श्रीहरिकोटा। देश के बहुप्रतिक्षित और महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 आज 2.43 बजे चांद को छूने के लिए अपनी उड़ान भरेगा। यह उड़ान इसरो के बाहुबली जीएसएलवी एमके-III के जिम्मे होगी। यह बाहुबली अपने दम पर चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में ले जाएगा और इस उड़ान को सफल बनाने की पूरी कोशिश करेगा।

चंद्रयान-2 के लॉन्च होने के बाद बाहुबली इसे ठीक 16 मिनट बाद पृथ्वी की कक्षा में रखेगा। इसके बाद शुरू होगा इसका चांद को छूने का सफर। धरती से चांद की दूरी लगभग 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है और उससे पहले इसरो ऐसा कुछ करेगा जो सबकी सांसें रोक देने वाला होगा।

इसरो चीफ के सीवान के अनुसार इसरो चांद से 30 किमी पहले ही चंद्रयान-2 की स्पीड को कम करेगा। चांद की सतह पर उतरना आसान नहीं है और इस पूरे काम में 15 मिनट लगेंगे जो बेहद महत्वपूर्ण होंगे। साथ ही इसरो चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो ऐसा भारत करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। फिलहाल अमेरिका, रूस और चीन को ही यह महारत हासिल है।

ऐसा रहेगा चंद्रयान-2 का सफर

चंद्रयान-2 के लॉन्च होने के बाद इसके साथ जा रहे लैंडर-विक्रम (ख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के नाम) और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा की सतह तक जाएंगे। लैंडिंग से लगभग 4 दिन पहले रोवर उस जगह का मुआयना करेगा जिसके बाह लैंडर यान से अलग होकर आगे बढ़ेगा। इसके बाद लैंडर का दरवाजा खुलेगा और रोवर बाहर आएगा जो चांद की सतह पर आगे बढ़ेगा। इसके कुछ मिनटों बाद ही तस्वीरें मिलना शुरू होंगी। चंद्रमा की सतह की तमाम जानकारियां जुटाकर इसरो के अंतरिक्ष केंद्र भेजने का मुख्य काम प्रज्ञान का होगा।