चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इतिहास रचते हुए अंतरिक्ष में एक बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। इसरो का "बाहुबली" रॉकेट GSLV Mk-III अपने साथ चंद्रयान-2 को लेकर उड़ान भर चुका है। आप भी देखें लाइव

पढ़ें इस लॉन्च से जुड़ी हर अपडेट :

- चंद्रयान 2 की सफल लॉन्चिंग के बाद देश दुनिया से इसरो को बधाई मिल रही है।

- लोकसभा में भी स्पीकर ओम बिरला ने भी सदन में इस सफल लॉन्च की घोषणा करते हुए वैज्ञानिकों को बधाई दी।

- इसरो के इस सफल मिशन के लिए प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति समेत कईं बड़े नेताओं ने इसरो और देश को इस सफल लॉन्च पर बधाई दी है।

- इसरो प्रमुख के सीवान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि यह चांद और इसके दक्षिणी ध्रूव की तरफ यह भारत की ऐतिहासिर यात्रा है।

- भारत ने पहले प्रयास में ही चंद्रयान-2 अपने मिशन पर निकल गया है।

- चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक लॉन्च हो चुका है और इसरो के वैज्ञानिक ऑब्जर्वेशन रूम में एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं।

- इसरो के अनुसार रॉकेट की गति और स्थिति सामान्य है।

- अगले 16 मिनट चंद्रयान-2 के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि इस दौरान चंद्रयान-3 पृथ्वी की कक्षा में पहुंचेगा।

- लॉन्च के 10 सेकंड बाद तक बाहुबली चंद्रयान-2 को लेकर तय दिशा में आगे बढ़ रहा है।

- चंद्रयान-2 को लेकर बाहुबली ने उड़ान भर दी है और अब तक सबकुछ ठीक चल रहा है।

- बढ़ती जा रही धड़कनें और हर किसी की नजर इस लॉन्च पर टिकी हुई हैं।

- महज 1.30 मिनट बाकी है और लॉन्च होगा चंद्रयान-2

- बस कुछ ही पलों में उड़ान शुरू होगी और उसके लिए हलचल बढ़ गई है।

- अगर आप भी इस लॉन्च को लाइव देखना चाहते हैं तो इसरो की लाइव स्ट्रीम के माध्यम से देख सकते हैं। इसके लिए नीचे दिए गए यूट्यूब और फेसबुक लिंक पर क्लिक करें।

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- लॉन्च के लिए महज 18 मिनट बाकी हैं और लॉन्च सेंटर के भीतर सभी लोग एक दुसरे को बेस्ट ऑफ लक विश कर रहे हैं।

- इस लॉन्च के लिए रॉकेट में ईंधन भरने का काम जारी है और खबरों के अनुसार जीएसएलवी एमके-III में ईंधन भरने का पहला चरण पूरा हो चुका है वहीं अगला चरण जारी है।

- इस लॉचिंग के लिए रविवार शाम छह बजकर 43 मिनट पर काउंटडाउन शुरू किया गया जो फिलहाल जारी है।

- पहले यह प्रक्षेपण 15 जुलाई की तड़के दो बजकर 51 मिनट पर प्रस्तावित था। हालांकि प्रक्षेपण से करीब घंटेभर पहले रॉकेट में गड़बड़ी के कारण अभियान को रोकना पड़ा था।

सात सितंबर को पहुंचेगा चांद पर

अलग-अलग चरणों में सफर पूरा करते हुए चंद्रयान-2 सात सितंबर को चांद के दक्षिणी धु्रव की निर्धारित जगह पर उतरेगा।अब तक विश्व के केवल तीन देशों अमेरिका, रूस व चीन ने चांद पर अपना यान उतारा है।

चंद्रयान-1 ने खोजा था पानी

2008 में भारत ने चंद्रयान-1 लांच किया था यह एक ऑर्बिटर अभियान था। ऑर्बिटर ने 10 महीने तक चांद का चक्कर लगाया था। चांद पर पानी का पता लगाने का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।

सबसे मुश्किल मिशन

इसे इसरो का सबसे मुश्किल अभियान माना जा रहा है। सफर के आखिरी दिन जिस वक्त रोवर समेत यान का लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा, वह वक्त भारतीय वैज्ञानिकों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होगा।

तीन हिस्सों में बंटा है चंद्रयान-2

चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं-ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर। अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है। वहीं रोवर का नाम प्रज्ञान है, जो संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद लैंडर-रोवर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएंगे।

1 ऑर्बिटर : ये सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद लैंडर-रोवर ऑर्बिटर से अलग हो जाएंगे।

2 लैंडरः अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है। यह सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेगा।

3 रोवरः इसका नाम प्रज्ञान है, जो संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान। लैंडर उतरने के बाद रोवर उससे अलग होकर अन्य प्रयोगों को अंजाम देगा।

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