चेन्नई। भारत का रॉकेट जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल - मार्क 3 (जीएसएलवी एमके 3) चंद्रयान-2 के साथ चांद के सफर पर 15 जुलाई को निकलेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक अधिकारी के मुताबिक आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन प्रक्षेपण केंद्र से 15 जुलाई की सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर इसको लॉन्च किया जाएगा। लॉन्चिंग के करीब 16 मिनट बाद यह रॉकेट चंद्रयान-2 को कक्षा में स्थापित कर देगा। 640 टन वजनी इस रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपये है। इस रॉकेट को इसरो के अधिकारी 'फैट बॉय' (मोटा लड़का) कहकर पुकारते हैं। वहीं तेलुगु मीडिया ने इसको 'बाहुबली' नाम दिया है।

इसरो ने बताया कि चंद्रयान-2 की कक्षा को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। चांद के प्रभाव क्षेत्र में पहुंचने के बाद यान में लगे इंजन धीमे हो जाएंगे। 603 करोड़ रुपये की लागत से बने इस यान के तीन हिस्से हैं- ऑर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान। लैंडर विक्रम का नाम अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। वहीं प्रज्ञान संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान। चांद की कक्षा में पहुंचने के चार दिन बाद लैंडर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा।

लैंडर विक्रम छह सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेगा और वहां तीन वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा। चांद पर लैंडर उतरने के बाद रोवर उससे अलग होकर अन्य प्रयोगों को करेगा। यह चांद पर एक दिन तक प्रयोगों को अंजाम देगा। इस दौरान वह दो प्रयोगों को अंतिम रूप देगा। धरती के हिसाब से यह अवधि 14 दिन की बनेगी। वहीं ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए आठ प्रयोगों को अंजाम देगा। इस पूरे अभियान में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी एक प्रयोग को अंजाम देगी।