लखनऊ। असम में एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस पर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। असम में एआरसी कई दांव-पेंचों में उलझा हुआ है और विरोध के स्वर भी हर तबके से उठ रहे हैं। वहीं देश के दूसरे हिस्सों में भी एनआरसी को लागू करने की बातें उठने लगी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यदि जरूरी हुआ तो वह उत्तर प्रदेश में भी एनआरसी को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि असम में एनआरसी को लागू करना एक अहम और साहसिक फैसला है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए NRC है बेहद जरूरी

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि असम में कोर्ट के फैसले को लागू करना एक साहस भरा फैसला है और इसके लिए हमको पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह को बधाई देना चाहिए। इस फैसले को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए और मेरा मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश में इसकी जरूरत हुई तो एनआरसी को लागू किया जाएगा। असम में नागरिकता सूची पर अमल करना उत्तर प्रदेश के लिए एक उदाहरण है। हम असम से इसको सीखकर इसको हमारे यहां पर चरणबद्ध तरीके से लागू कर सकते हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है और इससे संबंधित प्रदेश के गरीबों के हित दूसरे देश के लोगों के द्वारा ले जाने पर भी लगाम लगेगी।

हरियाणा में भी बनेगा NRC

इससे पहले रविवार को हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि उनकी सरकार अवैध अप्रवासियों की पहचान के लिए प्रदेश में नागरिकता सूची को तैयार करेगी। हम असम के नक्शे-कदम पर चलते हुए इस लिस्ट को बनाएंगे। सीएम खट्टर ने यह बात पूर्व नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा और सेवानिवृत्त जज एच एस भल्ला के साथ पंचकुला में वार्ता के बाद कही।

असम की फाइनल नागरिकता सूची पिछले महीने रिलीज की गई थी। इसमें करीब 19 लाख लोगों का लिस्ट में नाम नहीं है। ये लोग प्रदेश में स्थापित किए गए 300 विदेशी ट्रिब्यूलन में अपना नागरिकता प्रमाण पेश कर सकते हैं।