रंजन दवे, जोधपुर । राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत ने अपने गृह क्षेत्र जोधपुर में कांग्रेस के अब दो जिलाध्यक्ष बनवाने के साथ दक्षिण क्षेत्र में ब्राह्मण कार्ड खेला है। अशोक गहलोत ने जोधपुर शहर को दो भागों में बांट कर दक्षिण क्षेत्र में नरेश जोशी को जिलाध्यक्ष बनाकर आने वाले समय में जोधपुर की राजनीति में उलटफेर से बहुत बड़े संकेत दे दिए हैं।

हालांकि उत्तर यानि शहर में उसी पुराने ढर्रे के तहत अल्पसंख्यक कार्ड खेलते हुए सलीम खान केा जिलाघ्यक्ष बनाया है। जोधपुर में हालांकि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के पद पर पिछले लंबे समय से सईद अंसारी काबिज रहे थे, लेकिन इस बार नए चेहरों पर दांव खेला गया है। वही जोधपुर ग्रामीण में हीराराम मेघवाल पर एक बार फिर विश्वास जताकर पुणे ग्रामीण कांग्रेस की कमान दी गई है। गहलोत के ब्राह्मण कार्ड को लोग सूरसागर विधानसभा से जोड़कर देख रहे हैं जहां लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी कि ब्राह्मण कैंडिडेट सूर्यकांता व्यास कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशी को हराकर विधानसभा पहुंचती आई है।

कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में बडी खासियत की बात यह कि इस बार निगम की तर्ज पर कांग्रेस संगठन को भी दो हिस्सों में बांटा गया है। गहलोत ने अपने गृह जिले जोधपुर में सईद अंसरी को अध्यक्ष बनाने के डेढ़ दशक बाद एक की जगह महानगर स्टाइल में दो दो शहर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दिए है। जोधपुर दक्षिण में नरेश जोशी व उत्तर में सलीम खान जैसे को बाजी सौंप भविष्य की राजनीति बडे संकेत दिए है। वहीं जोधपुर देहात की बागडोर दुबारा बिलाड़ा से कांग्रेस के विधायक हीरालाल मेघवाल को जिलाध्यक्ष बना जिम्मा सौंपा है। ऐसे में दोनों के सामने मृतप्राय चल रहे शहर कांग्रेस के संगठन में जान फूंकनी होगी। मुख्यमंत्री गहलोत के कम चर्चित चेहरों पर दाव खेलने से एक बार जोधपुर की राजनीतिज्ञों को चौंका दिया है।

राजनीति मे यह माना जा रहा है कि नरेश जोशी को जिलाध्यक्ष बनाने में मुख्यमंत्री गहलोत के सिपह सलाहकार पुखराज पाराशर की ही अहम भूमिका रही है। इससे बाकी जो नए पुराने ब्राह्मण नेता कतार में थे उनके अरमानों पर पानी फिर गया है।


सूरसागर के हिसाब से ब्राह्मण कार्ड खेला

सियासी जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री गहलोत पर शुरू से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि सूरसागर को देखते हुए इस बार रणनीति बदलेंगे और दक्षिण की बागडोर किसी ब्राह्मण के हाथ में होगी और दूसरे यानि उत्तर की जिम्मेदारी किसी मुस्लिम यानि अल्पसंख्यक की सौंपी जाएगी।

हालांकि तर्क यह भी दिया जा रहा था कि सईद अंसारी डेढ़ दशक अध्यक्ष रहे है, खुद सूरसागर से चुनाव भी लड़ चुके है लेकिन यहां बीजेपी के ब्राह्मण कार्ड का काट ब्राह्मण कार्ड ही होना चाहिए। इसकी लंबे समय से डिमांड भी पार्टी में अंदरूनी की जा रही थी। हालांकि जिलाध्यक्ष की दौड़ में कई चर्चित चेहरे कतार में थे लेकिन सियासत के जादूगर गहलोत ने इस बार किसी को भनक तक नहीं लगने दी और कार्यकर्ताओं के बीच से सलीम खान और नरेश जोशी को उठाकर जिलाध्यक्षों का जिम्मा दे दिया।

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