CoronaVirus Effect: कोरना वायरस महामारी की केवल देश की देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था पर ही नहीं बल्कि घर-घर की अर्थव्यवस्था बिगाड़कर रख दी है। घर-घर के बजट का स्वरुप बदल गया है। बाजार की स्थिति का आकलन करने वाली फर्म नील्सन द्वारा किए गए सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके मुताबिक कोरोना ने घरेलू आय पर असर डाला है, परिवारों को निवेश में कटौती करने और घरेलू खर्च में बचत की ओर शिफ्ट करने को मजबूर किया है।

नील्सन ने अप्रैल में लोगों को कम, मध्यम और उच्च आय वाले घरों में उनकी वित्तीय स्थिति के लिए 12 शहरों में सर्वे किया। इसके तहत करीब 60% लोगों ने कहा कि महामारी ने उनके घरेलू आय पर नकारात्मक असर डाला है। इस दौर में उन्होंने विभिन्न श्रेणियों के मासिक बजट में बदलाव करने का फैसला किया है। नील्सन के मुताबिक सितंबर तिमाही के लिए पूर्व नियोजित खर्चों की पुनः जानकारी ली जा रही है क्योंकि लोग अब भविष्य के खर्चों को देखते हुए बचत और अन्य निर्धारण कर रहे हैं।

ये पूरी स्थिति कोविड -19 द्वारा उत्पन्न वित्तीय अनिश्चितता का परिणाम है। जिसके चलते उद्योगों में फिलहाल तालाबंदी और छंटनी का दौर चला है। इसी वजह से आर्थिक गतिविधि में गिरावट आई है। नीलसन ने कहा- घरों की आय के अधिकांश हिस्से पर नकारात्मक असर हुआ है। इससे लोगों का नियमित खर्च बढ़ा है और अब वे संतुलन लाने के लिए निवेश में कटौती करके बजट को प्रबंधित कर रहे हैं।

हालांकि नील्सन के अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को रेपो दर में 40 आधार अंकों की कटौती की है, जिससे लोन की दरें कम होंगी और लोगों को थोड़ी राहत मिलेगी। RBI ने 3 ऋण चुकाने की वर्तमान तीन महीने की मोहलत को और बढ़ा दिया है।

सर्वे के मुताबिक लोगों ने अब निवेश, बचत (बैंक या हाथ में नकदी), ऋण और क्रेडिट कार्ड के बकाए और मासिक घरेलू खर्चों के बीच अपने व्यय आवंटन को बदलने के संकेत दिए हैं। जो निष्कर्ष निकले हैं उनके मुताबिक निम्न से मध्यम और उच्च आय वाले लोगों ने अपनी मासिक आय को देखते हुए बजट आवंटन में 20% से लेकर 16% तक निवेश की कमी करने का फैसला किया है।

नील्सन के अनुसार निम्न आय वर्ग में 50 हजार के मासिक आय वाले, मध्यम आय वर्ग में 50 हजार से 1 लाख मासिक और उच्च आय वर्ग वालों की 1 लाख से ऊपर मासिक आय वाले लोग शामिल हैं। दक्षिण एशिया नील्सन ग्लोबल कनेक्ट के पश्चिम बाजार नेता समीर शुक्ला ने कहा- कम आय वाले घरों में नियमित खर्च बढ़ा है, जबकि उच्च आय वाले घरों पर इसका कोई असर नहीं है।

लोगों ने ये भी कहा कि उनकी योजना फिलहाल बड़ी यात्रा और कोई महंगा उपकरण खरीदने की बिल्कुल नहीं है। सर्वे में केवल 28% लोगों ने कहा कि वे अपने पूर्व नियोजित योजना के तहत ही चलेंगे, जबकि 24% लोगों ने कहा कि उन्होंने अपनी योजनाओं को फिलहाल एक साल के लिए टाल दिया है। 20% से ज्यादा लोगों ने कहा कि वे अपने फंड पर फिलहाल ऐसे ही बनाए रखना चाहेंगे, जबकि इतने ही प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपना पैसा निवेश करेंगे।

कुल मिलाकर बाजार की तरह ही लोगों ने अपने घर के बजट में बड़े पैमाने पर बदलाव के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों के लिए लोगों के मुनाफे कम हो जाएंगे। शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न भी कम आएंगे। लोगों ने बाहर खाना खाने में कटौती, रेस्टॉरेंट या होटल में खान-पान में कमी करने की बात कही है।

Posted By: Rahul Vavikar

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