मधुबनी। CoronaVirus effect: कोरोना वायरस संक्रमण और लॉकडाउन की स्थिति के बीच लोगों का जनजीवन प्रभाविभ हुआ है। लॉकडाउन में लंबे समय तक फंसने के बाद सहदेव राम (53) स्वजनों के पास रहने के लिए घर आ रहे थे। काम बंद होने के बाद चेन्नई से यह सोचकर चले कि गांव में ही कुछ किया जाएगा। पर उनका यह सपना चेन्नई से चली ट्रेन के मधुबनी पहुंचने से पहले खत्म हो गया। ट्रेन के मधुवनी में रुकने से पहले उनकी सांसों की डोर थम गई। सहदेव की मौत उस समय हो गई जब ट्रेन ओडिशा से गुजर रही थी।

बता दें कि मंगलवार रात 2.30 बजे मधुबनी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने पर इसकी जानकारी उनके साथ आ रहे लोगों ने स्थानीय रेल प्रशासन को दी। वे सहदेव के शव के साथ करीब 34 घंटे का सफर कर यहां पहुंचे थे। दरअसल लोगों को काफी देर तक पता ही नहीं चला कि सहदेव की मौत हो चुकी है। वे मान रहे थे कि सहदेव थकान के कारण सोए हुए हैं। मधुबनी पहुंचने पर उन्हें सहदेव की मौत का पता चला। इसके बाद उन्होंने स्टेशन स्टाफ को इस बारे में बताया। स्टेशन प्रशासन ने ट्रेन में शव मिलने की सूचना जिला प्रशासन को दी। मगर ट्रेन से शव उतारने की प्रक्रिया में करीब 8 घंटे लग गए। इतने घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों के स्टेशन पहुंचने पर शव उनके रिश्तेदार महेश कुमार राम व ग्रामीण गणेश चौपाल को सौंपा गया।

जीआरपी प्रभारी विनोद राम ने बताया कि झंझारपुर के नवानी निवासी सहदेव की ट्रेन में तबीयत बिगड़ गई थी। लगातार दस्त होने के बाद वे डिहाईड्रेशन का शिकार हुए और बीमार पड़ गए। सोमवार शाम करीब चार बजे उनकी मौत ट्रेन में ही हो गई। शव का पोस्टमार्टम नहीं किया गया। हालांकि कोरोना की जांच को लेकर सैंपल लिया गया है। 8 घंटे तक शव के ट्रेन में रहने से स्टेशन अधिकारियों और सहदेव के साथ में यात्रा करने वाले यात्रियों में भय का माहौल बन गया था।

Posted By: Rahul Vavikar

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