Coronavirus के बढ़ते खतरे के बीच उद्योग समूह ने सरकार से राहत की अपील की है। इसके बाद माना जा रहा है कि Coronavirus से जिस तरह से देश की अर्थव्यवस्था के तहस-नहस होने का खतरा पैदा हुआ है उसे रोकने के लिए सरकार की तरफ से जल्द ही बड़े आर्थिक पैकेज का ऐलान हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन चुनौतियों से निबटने के संभावित उपायों पर देश के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये लगभग 75 मिनट तक चर्चा की। जानकारी के मुताबिक, PM modi खुद बमुश्किल 10 मिनट बोले, बाकी पूरा वक्त उन्होंने उद्योग जगत के लोगों को सुना। पढ़िए क्या सुझाव दिए गए -

- सरकार के सामने मांग रखी गई कि एक तरफ जहां कम आय वर्ग के लोगों के हाथ में पैसा पहुंचाने की तत्काल व्यवस्था होनी चाहिए, वहीं उद्योग जगत पर कर्ज चुकाने की लटकी मौजूदा तलवार को हटाने की व्यवस्था होनी चाहिए।

- उद्योग जगत की सबसे बड़ी चिंता कर्ज चुकाने की है। लॉकडाउन की स्थिति में औद्योगिक गतिविधियों पर ताला लगता जा रहा है। ऐसे में जिन उद्यमियों का मासिक किस्त कट रही है, उनके लिए इसे जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

- पीएम मोदी के समक्ष मांग रखी गई कि कम से कम 6 महीने तक बकाये कर्ज पर कोई भी ब्याज नहीं लिया जाए। कर्ज की अवधि में 6 माह की वृद्धि कर यह काम आसानी से किया जा सकता है। उद्योग जगत ने नए कर्ज के लिए ब्याज दर एक फीसद तक घटाने का सुझाव भी दिया है।

- पीएम के साथ बैठक में उद्योग जगत ने खासतौर पर मांग की है कि मौजूदा परिस्थिति में अगले करीब एक वर्ष तक भुगतान नहीं होने वाले कर्ज को एनपीए घोषित नहीं किया जाए।

- इस पर उद्योग चैंबरों ने मांग रखी है कि इस नियम को नौ महीनों से एक वर्ष तक के लिए स्थगित किया जाए, ताकि कर्ज कंपनी प्रबंधन को मौजूदा मंदी से निपटने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

- उद्योग जगत की तरफ से एक बड़ी मांग यह थी कि अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए देश की बड़ी आबादी के हाथ में नकदी पहुंचाना जरूरी है। Coronavirus की वजह से प्रभावित उद्योगों के सभी कामगारों व खासतौर पर असंगठित क्षेत्र के युवा कामगारों के हाथ में 5,000 रुपये पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। जबकि एक निश्चित आय-सीमा वाले 65 वर्ष से ज्यादा आयु-वर्ग के लोगों के हाथ में 10 हजार रुपये देने की व्यवस्था होनी चाहिए।

Posted By: Arvind Dubey