नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में उठने वाले चक्रवात 'मोरा' मंगलवार सुबह बांग्लादेश पहुंच गया है। मोरा के चलते म्यांमार के रोहिंग्या लोगों के शरणार्थी कैंपों में भारी तबाही की खबर आ रही है। जानकारी के अनुसार यहां शरणार्थियों के लिए बने घरों को तोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है। खबर है कि मोरा के चलते लगभग 3.50 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। लोग आंधी और बारिश में अपने घर छोड़कर भाग रहे हैं। रोहिंग्या समाज के नेता शमशुल आलम के अनुसार बाहुखली और कुटुपलोंग में बने अस्थायी 10 हजार घर पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं।

ताजा जानकारी के अनुसार इसके चलते कोक्स बाजार में 117 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल रहीं हैं और भारी बारिश हो रही है। देश में अब तक का सर्वोच्च अलर्ट जारी किया गया है।

मोरा के चलते भारतीय नौसेना बांग्लादेश की मदद के लिए पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है। वहीं दूसरी ओर मोरा का असर पूर्वोत्तर के कई भारतीय राज्यों पर भी पड़ सकता है, इसको लेकर चेतावनी भी जारी कर दी गई है। मोरा तूफान के दौरान लगभग 54 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेगी, जो कि 88 किमी प्रति घंटे तक जा सकती हैं

भारतीय तट की तरफ आने पर इसकी वजह से करीब 65 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। लेकिन इस बीच मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि इस चक्रवात से भारत को घबराने की जरूरत नहीं है। यह भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्‍तक है जो किसानों और फसलों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉक्‍टर केजे रमेश के मुताबिक मोरा चक्रवात भारत में मानसून की शुरुआत है। उन्‍होंने बताया है कि यह मंगलवार को पश्चिम बंगाल से लेकर केरल तक पहुंच जाएगा। इस दौरान भारत के तटीय इलाकों में अच्‍छी बारिश की संभावना है। उन्‍होंने मोरा चक्रवात को लेकर किसी भी तरह की दहशत को दरकिनार करते हुए कहा है कि यह चक्रवात भारत किसानों के लिए काफी अच्‍छा साबित होगा। उनके मुताबिक फिलहाल इसकी पॉजीशन चिटगांव में है। जिसकी वजह से वहां पर तेज हवाएं और बारिश हो रही हैं। इसकी वजह से वहां पर कुछ नुकसान हो सकता है लेकिन भारतीय इलाकों में इसका प्रभाव खतरनाक साबित नहीं होगा।

उनका कहना है कि भारत के तटीय इलाकों तक पहुंचते पहुंचते यह मंदा पड़ जाएगा लिहाजा इससे घबराने की जरूरत नहीं है। इस चक्रवाती तूफान की वजह से मानसून केरल से पहले पूर्वोत्तर भारत में दस्तक देगा। इसके बाद भी भारत के तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी गई है। डॉक्‍टर रमेश के मुताबिक, मोरा 30 मई को चटगांव के पास बांग्लादेश तट को पार कर जाएगा। इसकी वजह से पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों में भारी बारिश हो सकती है। उनके मुताबिक इस दौरान दक्षिण असम, मेघालय, त्रिपुरा, और मिजोरम में भारी बारिश हो सकती है। यह बंगाल की खाड़ी के कुछ और भागों तथा अरब सागर में आगे बढ़ाने में मददगार होगा।

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