भुवनेश्वर। चक्रवाती तूफान "तितली" आखिरकार ओडिशा के गोपालपुर में तट से टकराने के बाद आगे बढ़ गया है। अपने भीषण रूप में ओडिशा पहुंचा यह तुफान तट से टकराने के साथ ही तबाही मचाने लगा। इसके साथ ही अब यह पश्चिम बंगाल की तरफ बढ़ रहा है। यह तूफान पलासा एवं श्रीकाकुलम देते हुए पश्चिम बंगाल की तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।

वहीं इसके असर से आंध्र प्रदेश में भी भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है और मिल रही जानकारी के अनुसार राज्य में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है।

तूफान के कारण मछुआरों की एक नाव पलट गई जिसमें से 5 मछुआरों को बचाया गया है।

गुरुवार अल सुबह भुवनेश्वर के गोपालपुर पहुंचे तितली के लैंडफॉल के साथ ही 126 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने लगी और हर चीज तिनके की तरह उड़ती नजर आई।

मौसम विभाग के डायरेक्टर एचआर बिस्वास के अनुसार जमीन से टकराने के एक या दो घंटों में यह चक्रवात ओडिशा से आगे जाएगा। इन दो घंटों में यह राज्य में कितनी तबाही मचाएगा इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। जहां ओडिशा में हवा की रफ्तार 126 किमी की थी वहीं आंध्र प्रदेश में यह 56 किमी की रफ्तार से चल रही थी।

इससे पहले चक्रवात के गोपालपुर पहुंचने के पहले से ही तेज हवा के साथ ओडिशा के भुवनेश्वर, बालासोर, गजपति, गंजाम, पुरी और केंद्रपाड़ा जिले में बारिश शुरू हो गई थी। आशंका जताई गई है कि तूफान के प्रभाव से एक तरफ जहां 160 से 165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलेगी, वहीं जोरदार बारिश की भी चेतावनी जारी की गई है। इसे देखते हुए पूरे राज्य में प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है। तितली ने पश्चिम बंगाल में भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। वहीं खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है। उधर केंद्र ने तीनों राज्यों के लिए एनडीआरएफ के 1000 कर्मियों को भेजा है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को राज्य सचिवालय में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर तूफान से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निचले इलाके में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का निर्देश दिया है। बुधवार की रात करीब साढ़े 11 बजे तितली का केंद्र गोपालपुर समुद्र तट से लगभग 150 किलोमीटर दूर था, जो 15-16 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ रहा था। गुरुवार की सुबह 5.30 बजे यह तूफान ओडिशा के गोपालपुर बंदरगाह से टकराया।

राहत को 38 विशेष टीमें भेजी गईं

चक्रवात से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारी की है। तूफान के दौरान प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए 38 विशेष टीमें भेजी गई हैं। विशेष राहत आयुक्त विष्णुपद सेठी के अनुसार, स्थिति से निपटने के लिए केंद्र से मदद मांगी गई है। जरूरत पड़ने पर थल एवं वायु सेना की मदद ली जाएगी। गुरुवार व शुक्रवार को सभी स्कूल-कॉलेज एवं आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं।

सिर्फ गंजाम में हटाए गए दो लाख लोग

सिर्फ गंजाम जिले में निचले इलाकों के दो लाख लोगों को राहत शिविर में लाया गया है। शिविर में लोगों को खाना दिया जा रहा है। साथ ही दवा और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

इन जिलों में रेड अलर्ट

चक्रवात को लेकर ओडिशा के गजपति, गंजाम, पुरी, जगतसिहपुर, केंद्रपाड़ा, भद्रक व बालासोर जिले को रेड अलर्ट पर रखा गया है। उधर आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।

बंगाल में भी असर

चक्रवाती तूफान "तितली" ने पश्चिम बंगाल में भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक बुधवार को कोलकाता व इससे सटे उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिले में बारिश हुई। उधर, दीघा में समुद्र में ऊफान देखा गया। दूसरी ओर तितली तूफान ने बिहार में भी मौसम का मिजाज बदल दिया है। गुरुवार की सुबह तक तूफान के बिहार-झारखंड की ओर बढ़ने की आशंका है।

पाकिस्तानी मौसम वैज्ञानिकों ने नाम दिया तितली

हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने भारत की पहल पर चक्रवात को नाम देने की व्यवस्था शुरू की। इस समूह में भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार, मालदीव, श्रीलंका, ओमान और थाइलैंड शामिल हैं। इन देशों के मौसम वैज्ञानिकों ने 64 नामों की सूची बनाई। हर देश की तरफ से आठ नाम थे। इस बार नामकरण की बारी पाकिस्तान की थी। पाकिस्तान की ओर "तितली" नाम प्रस्तावित था। इसलिए मौजूदा चक्रवात का नाम "तितली" रखा गया।

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