मुंगेर। दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर प्रकरण में मुंगेर के लॉ कॉलेज में जांच के दौरान पुलिस को जो साक्ष्य मिले हैं, उससे बड़े पैमाने पर डिग्री घोटाले के संकेत मिल रहे हैं। जांच में यह भी पता चल रहा है कि मुंगेर लॉ कॉलेज से तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय तक शिक्षा माफियाओं का बड़ा नेटवर्क फैला है। जो थोड़े से पैसे खर्च करने पर बाहरी छात्रों को आराम से लॉ की डिग्री दिलवा देते हैं।

इससे पूर्व दिल्ली पुलिस की नोटिस पर लॉ कॉलेज के प्राचार्य आरके मिश्रा सहित आधे दर्जन कर्मियों ने दिल्ली के हौजखास थाने में पहुंच कर अपना बयान कलमबंद कराया। दिल्ली पुलिस ने कर्मचारियों से तोमर के गायब दस्तावेज के बारे में पूछताछ की। पुलिस ने स्पष्ट कहा कि गायब दस्तावेज के लिए कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी। या तो दस्तावेज उपलब्ध कराएं या फिर जेल जाने को तैयार रहें।

पुलिस ने यह भी पूछा कि लॉ कालेज में वर्ष 1994, 95 आदि वर्षों में एक साथ हजार से अधिक छात्रों का नामांकन कैसे लिया? क्या कॉलेज में इतना संसाधन था कि सभी छात्र एक साथ पढ़ाई कर सकें। बिना प्रमाण पत्र का सत्यापन कराए नामांकन और रजिस्ट्रेशन पर कैसे सहमति दे दी गई?

इधर, लॉ कॉलेज के प्राचार्य के दिल्ली से लौटते ही दिल्ली पुलिस के एसीपी एसपी त्यागी ने फोन कर उन्हें भागलपुर विश्वविद्यालय बुलवा लिया। जहां प्राचार्य के समक्ष विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से पूछताछ की गई।

"मैंने दिल्ली के हौजखास थाने में भी वही बात कहीं जो दिल्ली पुलिस टीम के समक्ष मुंगेर में कही थी। चूंकि यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है, इसलिए कॉलेज में उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर मैंने पुलिस के सवालों के जवाब दिए।"

- आरके मिश्र, प्राचार्य लॉ कॉलेज, मुंगेर

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