नई दिल्ली। बचपन से हमें चोरी ना करने की सलाह दी जाती है और यह जरूर समझाया जाता है कि चोरी करना पाप है। लेकिन भारत में एक ऐसा मंदिर है जहां चोरी करने की परंपरा है क्योंकि इससे मनोकामना पूरी होती है। एक ऐसा मंदिर जहां लोग चोरी सिर्फ अपनी मन्नत को पूरा करने के लिए करते हैं। यह उत्तराखंड के रुड़की के चुड़ियाला गांव स्थित एक प्राचीन और अनोखा मंदिर सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी का है।

इस मंदिर के बारे में प्रचलित है कि कई सदियों एक राजा इस जंगल में आए थे जो कि संतान विहीन थे। इस स्थान पर उन्हें मां की पिंडी के दर्शन हुए। पिंडी के दर्शन होने के बाद राजा को पुत्र की प्राप्ति हुई। राजा ने दर्शन करते समय मां के सामने संतान प्राप्ति की ही इच्छा रखी थी। मां ने उनकी विनती स्वीकार कर ली थो को राजा को कुछ महीने बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तब उन्होंने प्रसन्न होकर मां का भव्य मंदिर यहां बनवाया।

इस प्रचलित कथा के बाद से मंदिर में संतान की चाह रखने वाले दंपत्ति यहां आकर मां के दर्शन करते हैं और अपनी इच्छा बताते हैं। यहां एक परंपरा और निभानी होती है। मां के मूर्ति के सामने एक लकड़ी का गुड्डा रखा रहता है, जिसे दंपति को चुराना होता है। दर्शन करने के बाद दंपति को इस गुड्डे को अपने साथ घर ले जाना होता है। पुत्र प्राप्ति होने के बाद दंपति को अपने पुत्र के साथ यहा आकर भंडारा करना होता है और साथ ही लकड़ी का गुड्डा चढ़ाना होता है।

इस मंदिर में ऐसी ही चोरी की प्रथा है। यह भी प्रचलित है कि मां सती के अंग और आभूषण जिस-जिस जगह गिरे वहां शक्तिशाली शक्तिपीठों की स्थापना हुई है। मान्यता है की इस मंदिर की जगह पर मां सती का चूड़ा गिरा था। इसलिए इस मंदिर का नाम चूड़ामणि देवी मंदिर रखा गया है।

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