गुवाहाटी। आज देवशयनी एकादशी है जिसे आषाढ़ी एकादशी भी कहा जाता है। आज ही के दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए विश्राम करने क्षीरसागर में चले जाते हैं। इन चार माह तक 16 संस्कार वर्जित माने जाते हैं। भगवान विष्णु के शयन पर जाने के बाद सृष्टि के पालनहार की जिम्मेदारी भगवान शिव पर आ जाती है। इन चार माह तक भगवान शिव सृष्टि का पालन करते हैं।

देवशयनी एकादशी के इस पवित्र मौके पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो देखने मंत्रमुग्ध कर देगी। दरअसल, मानसून के चलते उत्तर भारत के राज्यों में बारिश जारी है और इसके कारण असम में बाढ़ जैसे हालात हैं। ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से उपर बह रही है और इस दौरान गुवाहाटी के कालीपुर में चक्रेश्वर मंदिर में अनोखा नजारा बना।

उफनती ब्रह्मपुत्र का नदी का पानी बढ़ते-बढ़ते भगवान विष्णु के मंदिर तक पहुंच गया। इस दौरान नदी में पिलर पर बनी नाग शैय्या पर लेटे भगवान विष्णु की प्रतिमा तक पहुंच गया। हर साल बारिश के दिनों में यहां ऐसा नजारा देखने को मिलता है और ऐसे में देवशयनी एकादशी पर भी कुछ ऐसा ही नजर दिखाई दिया।

इसे देखकर लग रहा था मानों भगवान विष्णु सच में ही क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर योग निंद्रा में लेटे हुए हों। यह तस्वीर अब सोशल मीडिया में वायरल हो रही है।

राज्य में बाढ़ के हालात

असम में भी इनदिनों बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं।गुवाहाटी से होकर बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का जल स्तर चेतावनी स्तर को पार कर जाता है। अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अनुभाग अधिकारी वी गांधी ने कहा है, 'पानी चेतावनी स्तर को पार कर गया है, यह अभी भी खतरे के स्तर पर नहीं है। 1-2 दिनों में, यह यहाँ खतरे के स्तर को भी पार कर सकता है।'

असम के 33 जिलों में से आधे जिले बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। इन जिलों के कई लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कई जिलों में बाढ़ आ गया है। इस कारण कई लाख लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। बाढ़ के कारण कई हजारो हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। नदी के कटाव के कारण कई गांवों पर अस्तित्व बचाने का खतरा मंडरा रहा है। 50 से अधिक सड़कें और दर्जन भर पुल पानी में डूबे हैं।

Posted By: Ajay Barve