कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल का मामला बिगड़ गया है। अब IMA यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने देशभ में हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इसके तहत 17 जून को देश के सभी अस्पताल बंद रहेंगे। इस दौरान सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। इससे पहले शुक्रवार को विभिन्न राज्यों के डॉक्टर बंगाल के डॉक्टरों के साथ आ गए। इस बीच, पश्चिम बंगाल में तो 100 से ज्यादा डॉक्टरों के इस्तीफे की सूचना है जिनमें से 27 तो दार्जीलिंग के नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज के हैं।

वहीं आरजी कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल कोलकाता के 16 डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। डॉक्टरों ने लिखा है कि वर्तमान हालात में हम अपनी सेवाएं नहीं दे सकते इसलिए पद से इस्तीफा दे रहे हैं।

जहां एक तरफ हड़ताल जारी है वहीं ममता सरकार की परेशानियां भी कम नहीं हो रही। इस हड़ताल के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची ममता बनर्जी को झटका लगा है।

हाईकोर्ट ने कुणाल साहा की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा है कि डॉक्टरों पर हुए हमले के मामले क्या कार्रवाई हुई है। इसे लेकर अगले शुक्रवार को सुनवाई होगी।

कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए ममता बनर्जी को एक हफ्ते का वक्त दिया है और जल्द से जल्द स्थिति समान्य करने की बात कही है। वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों की हड़ताल का असर पूरे देश में नजर आ रहा है।

एम्स के डॉक्टरों ने आंदोलन का समर्थन करते हुए शुक्रवार को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की घोषणा की है और देशभर में मौजूद अपने संगठनों से भी इसमें शामिल होने की अपील की है। वहीं आईएमए ने भी अपनी सभी राज्य शाखाओं को शुक्रवार सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक जिला कलेक्टरों के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपने को कहा था। दूसरी तरफ दिल्ली एम्स के डॉक्टरों का एक दल दोपहर में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से मिला है।

डॉक्टरों की इस हड़ताल के समर्थन में धीरे-धीरे बड़े-बड़े अस्पताल भी जुड़ रहे हैं। सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर्स के फोरम ने कहा है कि वो इस मामले में पूरी तरह से पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों के साथ हैं।

शुक्रवार को कोलकाता में एनआरएस मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट के विरोध में धरना दिया।

हैदराबाद में भी निजाम्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए मार्च निकाला।

कोलकाता में ही नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज के छात्र भी विरोध प्रधर्शन करते नजर आए।

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने गुरुवार को "काला दिवस" का पालन किया। शुक्रवार को भी डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के चलते मरीजों का परेशानी का सामना करना पड़ा। कईं गंभीर बीमारों को एम्स की बजाय कहीं और इलाज तक करवाने का कह दिया गया।

आंदोलन के बीच उत्तर 24 परगना जिले के एक अस्पताल के 18 डॉक्टरों ने अस्पतालों में बढ़ती असुरक्षा व मुख्यमंत्री के बयान से क्षुब्ध होकर सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया।

इससे पहले बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के "अल्टीमेटम", "खुले पत्र" और "भावनात्मक अपील" के बावजूद पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल गुरुवार को लगातार तीसरे दिन जारी रही। इससे राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। इस बीच, यह आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय रूप लेने लगा है। एम्स के बंगाल के रेजिडेंट डॉक्टर और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन खुलकर आंदोलनकारी डॉक्टरों के समर्थन में आ गए हैं।