कानपुर। बालसाहित्य के पुरोधा व साहित्यकार डॉ. राष्ट्रबंधु (श्रीकृष्ण चंद्र तिवारी) ने बालसाहित्य के द्वारा न केवल बालमन में जगह बनाई बल्कि उनकी शिक्षा में भी महान योगदान दिया। मंगलवार को 82 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

सहारनपुर में वर्ष 1933 में जन्मे डॉ. राष्ट्रबंधु का परिवार 1940 में कानपुर में आकर बस गया। उनका बचपन बेहद अभावों में बीता। पेट भरने के लिए उन्होंने बूट पालिश, मजदूरी तक की। बाल साहित्य में उनके कार्य के लिए 2009 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें सम्मानित किया। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी उन्हें सम्मानित कर चुके थे।

उन्हें हरिकृष्ण तैलंग, बालसाहित्य सम्मान समेत कई पुरस्कारों व सम्मानों से नवाजा गया था। 1950 में उकी पहली पुस्तक बाल भूषण प्रकाशित हुई। डॉ. राष्ट्रबंधु ने तपती रेत, जयंतिया पर्व दिवस, भारत की महान बेटियां, 52 गांव इनाम में, ये महान कैसे बने, राजू के गीत, जादूघर से लगते बादल, टेसूजी की भारत यात्रा जैसी शानदार कृतियों की रचना की।

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