नई दिल्ली। चीनी कंपनी ने दावा किया है कि वह इस प्रकार का ड्रोन किसी देश की सेना को नहीं बेचती। कंपनी के इस दावे के बाद पाकिस्तान के उस आरोप की हवा निकल गई, जिसमें उसने कहा था कि उसकी सेना ने भारतीय ड्रोन को पाक अधिकृत कश्मीर में मार गिराया।

गौरतलब है कि बुधवार को पाकिस्‍तान की सेना ने जिस ड्रोन को मार गिराने का दावा किया था, उसे चीनी कंपनी डीजीआई ने बनाया था। पाक ने आरोप लगाया था कि भारत इस ड्रोन के जरिये जासूसी की कोशिश कर रहा था। चीनी कंपनी के इस दावे से पाकिस्तान के आरोपों पर सवाल उठे हैं। पाकिस्‍तान के आरोप के बाद भारतीय सेना और एयरफोर्स ने अपने किसी ड्रोन के क्रैश होने की खबर का खंडन किया था।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने इसकी फोटो भी जारी की थी। इस मामले में पाकिस्तान ने भारतीय उच्‍चायुक्‍त को भी तलब किया था। ड्रोन निर्माता कंपनी डीजीआई ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस की ओर से भेजी गई ईमेल के जवाब में यह बात कही। डीजीआई ने बताया कि ये ड्रोन शादियों, रियल एस्टेट और फिल्म निर्माताओं को बेचे जाते हैं, न कि किसी मिलिट्री या सिक्युरिटी एजेंसी को।

शेंजेन स्थित डीजीआई के प्रवक्‍ता माइकल पैरी ने ईमेल के जवाब में बताया कि हम सरकारी तंत्र को सीधे ड्रोन नहीं बेचते। हालांकि, किसी वेबसाइट या स्‍थानीय डीलर के जरिए वे इसे खरीद सकते हैं। डीजीआई का उद्देश्य ड्रोन का क्रिएटिव और इनोवेटिव इस्तेमाल है। हमें गर्व है कि हमारे प्रोडक्ट्स फिल्म मेकिंग, एग्रीकल्चर, वेडिंग फोटोग्राफी और रियल एस्टेट में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

मिलिट्री और सिक्युरिटी एजेंसियां को ड्रोन बेचना हमारा उद्देश्य नहीं है। हमें मीडिया के जरिए इस मुद्दे के बारे में पता चला। डीजीआई वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में दो डीलर उनके ड्रोन बेचते हैं। दोनों डीलरों ने बताया कि भारतीय सेना ने ड्रोन खरीदने के लिए उनसे कभी संपर्क नहीं किया।

दिल्ली स्थित डीजीआई ड्रोन के डीलर मयंक छाबड़ा ने बताया कि ये ड्रोन बतौर खिलौना इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिसकी बैटरी लाइफ 15 मिनट होती है। उन्होंने बताया कि किसी भी लिहाज से यह मिलिट्री ऑपरेशन लायक नहीं है। वहीं, मुंबई के डीजीआई डीलर अमित निछानी ने भी बताया कि इसकी रेंज 200-300 मीटर है, इसलिए इसे सैन्य मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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