Dussehra Vijayadashmi 2021 LIVE: पूरे देश में विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। आज रात रावण के पुतले के रूप में बुराइयों को अंत किया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) का सालाना कार्यक्रम नागुपर में हुआ। यहां संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पहले शस्त्र पूजन किया। इसके बाद पथ संचलन हुआ। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए यह आयोजन हो रहा है जिसमें इस बार सिर्फ 200 स्वंयसेवकों ने हिस्सा लिया। अपने सालाना संबोधन में संघ प्रमुख ने जनसंख्या नीति, ओटीटी प्लेटफॉर्म से फैलती बुलाइयां, देश में सामने आते ड्रग्स के केस के साथ ही तालिबान, पाकिस्तान, चीन, धारा 370 पर अपने विचार रखें। पढ़िए उनके संबोधन की बड़ी बातें

OTT प्लेटफॉर्म, ड्रग्स केस: ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जो दिखाया जाता है, उस पर कोई नियंत्रण नहीं है, कोरोना के बाद बच्चों के पास भी फोन हैं। नशीले पदार्थों का प्रयोग बढ़ रहा है...इसे कैसे रोकें? ऐसे व्यवसायों के पैसे का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए किया जाता है... इन सब पर नियंत्रण होना चाहिए।

जनसंख्या नीति: संघ प्रमुख ने कहा, बढ़ती आबादी चिंता का कारण है। इसलिए देश में जनसंख्या नीति तो लाना ही होगी।

तालिबान, चीन, पाकिस्तान: संघ प्रमुख ने कहा कि तालिबान खुद को बदलने का दावा कर रहा है। हो सकता है कि जो इन्सान पहले बुरा रहा हो, वो उसका हृदय परिवर्तन हो जाए, लेकिन क्या पाकिस्तान बदला है, क्या चीन बदला है। इसलिए हमें नए हालात के मुताबिक रणनीति बनाना चाहिए, लेकिन पूरी तैयारी भी रखना चाहिए।

संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा, सामाजिक समरसता मंच के माध्यम से स्वयंसेवक भेद-रहित समाज बनाने के प्रयास निरंतर कर रहें हैं। समाज के सभी लोगों को भेदभाव मिटाने के लिए परिवारों के साथ अनौपचारिक संवाद करना चाहिए और दूसरे परिवारों में उठना-बैठना चाहिए। हम सब विविधताओं को स्वीकार करते हैं, पूजा की विविधता को भी स्वीकार करते हैं। भारत में सबकी पूजा स्वीकार होगी। यह भारत की संस्कृति का सार है।

मोहन भागवत ने आगे कहा, व्यवस्था बदलने के लिए मन में परिवर्तन करना पड़ेगा, समाज में भेद पैदा करने वाली भाषा नहीं चाहिए। लोगों को आपस में जोड़ने वाली भाषा होनी चाहिए संघ के स्वयंसेवक प्रयास कर रहें।

यह वर्ष हमारी स्वाधीनता का 75वां वर्ष है। 15अगस्त 1947को हम स्वाधीन हुए।हमने अपने देश के सूत्र देश को आगे चलाने के लिए स्वयं के हाथों में लिए। स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर हमारी यात्रा का वह प्रारंभ बिंदु था।हमें यह स्वाधीनता रातों रात नहीं मिली।

हम “स्व” को भूल गए तो स्वजनों को भी भूल गए और अपने आपस में ही भेद इतने हो गए कि उसके कारण जर्जर हो गए। एक दूसरे को बराबरी से देखने को तैयार नहीं। हमें बाँटने वाली चौड़ी खाइयां बन गयी और उसका लाभ विदेशियों ने लिया।

व्यवस्था बदलने के लिए मन में परिवर्तन करना पड़ेगा। समाज में भेद पैदा करने वाली भाषा नहीं चाहिए। लोगों को आपस में जोड़ने वाली भाषा होनी चाहिए। संघ के स्वयंसेवक प्रयास कर रहें हैं।

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Posted By: Arvind Dubey