नई दिल्‍ली। प्रशांत महासागर में अल निनो का खतरा घट गया है। भारत के लिए यह राहत की खबर है। ऑस्‍ट्रेलियाई वेदर ब्यूरो ने अल नीनो को लेकर पहले जारी किया गया अलर्ट वापस ले लिया है। अन नीनो के कारण भारत में मानसून कमजोर रहने की आशंका जताई गई थी, जो अब कम हो गई है।

ब्यरो ने अल नीनो के खतरे की आशंका घटाकर 50 फीसदी कर दी है। इसके अनुसार अब अल नीनो इफैक्ट आधा होने की संभावना है, इससे इसका मानसून पर 70 फीसदी तक असर पड़ सकता है। यानी खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।

अल नीनो इफैक्ट कमजोर होने निश्चित तौर पर भारत के लिए राहत का विषय है, लेकिन शेष वर्षाकाल में खतरा पूरी तरह टला भी नहीं है।

प्रशांत महासागर गर्म

भारत में मानसून पर खास असर डालने वाले प्रशांत महासागर की सतह अब भी गर्म है। यहां से बहने वाली तूफानी हवाओं से ही दक्षिण-पूर्व एशिया में वर्षा होती है। इसके कमजोर या तेज होने से ही भारत में मानसून कमजोर या अच्छा रहता है।

हिन्द महासागर भी गर्म

भारतीय मौसम विभाग के अग्रणी मौसमविद् डी शिवनंदा पई का कहना है कि पूर्वी हिन्द महासागर में पानी गर्म होना भी भारत के लिए चिंता की वजह है। इससे भारतीय उप-महाद्वीप में वर्षा की गतिविधियों पर असर पड़ सकती है। हालांकि आगे माह यह तापमान सामान्य होने की स्थिति बन रही है।

वर्षा की कमी सिर्फ 24 फीसदी

देश के विभिन्‍न भागों में ग‍त दिनों अच्‍छी वर्षा हुई है, इससे देश में वर्षा की औसत कमी अब मात्र 24 फीसदी रह गई है, जो पहले 70 फीसदी थी। पिछले दिनों राजस्‍थान, उप्र और अब गुजरात में झमाझम वर्षा से हालात बदले हैं।

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