Elephant Death in Kerala : केरल में एक गर्भवती हथिनी से हुई बर्बरता ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। उसके मुंह में पटाखों से भरा पाइनएपल फोड़ा गया और उसने तड़पकर दम तोड़ दिया। इस घटना ने हर आम व खास को बैचेन कर दिया है। जाने माने उद्योगपति Ratan Tata रतन टाटा ने लिखा कि मैं इस घटना के बारे में जानकर हैरान हूं। कुछ लोगों ने मिलकर कैसे एक निर्दोष मादा हाथी को पटाखों से भरा पाइनऐपल खिलाकर उसकी जान ले ली। बेकसूर जानवरों के खिलाफ इस तरह के अपराधों में और इंसानों की इरादतन हत्‍या में फिर तो कोई अंतर ही नहीं रह गया है। सोशल मीडिया पर इस दर्दनाक हादसे को लेकर बेहद गुस्‍सा है। बॉलीवुड, बिजनेस, राजनीति आदि क्षेत्रों की हस्तियों ने भी अपने रीएक्‍शन देते हुए शिकायत जाहिर की है। यूजर्स इस मामले के दोषियों पर सख्‍त कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। देखें चुनिंदा कमेंट्स।

- Virat Kohli ने ट्वीट किया, 'केरल में जो कुछ भी हुआ वो जानकर दुखी हूं। आइए जानवरों से प्यार से पेश आए और इस तरह की कायराना हरकत को बंद करें।' विराट कोहली की पत्नी और बॉलीवुड एक्ट्रेस Anushka Sharma ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि हमें पशु क्रूरता के खिलाफ सख्त कानून की जरूरत है। उन्होंने इमोशनल कार्टून शेयर करते हुए अपराधियों को कड़ी सजा देने की मांग की।

- अभिनेता नीतिश भारद्वाज ने अपने फेसबुक पेज पर गुस्‍सा प्रकट करते हुए कहा कि,

I AM ANGRY, SAD, ASHAMED - क्या इसीलिए भगवान ने मनुष्य को उच्च स्‍तर की बुद्धि दी थी? तो फिर हमें कोरोना या चक्रवात से यह उम्मीद क्यों नहीं करनी चाहिए कि वह हमें मिटा डाले? यदि मनुष्य ऐसे ही बुरे कर्म करता रहे, तो हम तो प्रकृति द्वारा मिटा दिए जाने के ही योग्य हैं।

इस हत्‍यारे पर तो मुकदमा चलाया जाना चाहिये।

Vivek Ranjan Agnihotri ने लिखा,

- इस देश में गणेश की पूजा करते हैं और गजराज की हत्या करते हैं। वो भी गर्भवती जिसका नाम उमा देवी था। उमा देवी माने पार्वती।

ऐसे बनता है क्या कोई विश्व गुरु?

- Madhavi Khare

इस धरती पर सबसे ख़तरनाक प्रजाति #मनुष्य है.यदि ऐसे कृत्य करने वाले लोगो मे डर नही ला पाया कानून और समाज तो शायद हम कोरोना, चक्रवात और भूकंप जैसी आपदाओं के लायक ही है क्योंकि दर्द में तड़पते दोनों माँ बच्चे की बद्दुआ आसमान में जाकर कहीं न कहीं तो टकराएगी ही, आज नही तो कल । #RipHumanity #ElephantDeath, #KeralaElephant

- TARUN VIRAJ ने लिखा,

#WeAreTheVirus

#Elephants

#ElephantDeath

We deserve corona..!!!

We deserve cyclones..!!!

We deserve earthquake.!!

We deserve to die..!!

- Tarun Acharya ने लिखा, बहुत दुखी मन से यह पोस्ट डाली

आखिर क्या हो गया इंसान को ,

शायद अपने कर्मो का फल ही भुगत रहे है 😔😔😔 —

- DrMunish Kumar Mishra

#_सरोवर_में_तड़पती_गजिनी_को_बचाने_प्रभु_तुम_क्यों_न_आये?

यह #भारत है जहाँ पक्षी की हत्या से द्रवित होकर रामायण जैसे महाकाव्य का निर्माण होता है।

यह वह भारत है जहाँ हिरणी के नवजात बालक को बचाने के लिए हजारों सालों की तपस्या भी भंग कर दी जाती है।

यह #भारत की वह धरती है जहाँ बाज से एक पक्षी को बचाने के लिए अपना शरीर काट कर दे दिया।

यह वह भारत है जहाँ चींटियों तक को मारना पाप होता है।

यह वह भारत है जहाँ हमेशा विष उगलने वाले सर्प को दूध पिलाकर पूजा जाता है।

यह वह भारत है जग गजराज को बचाने स्वयं भगवान आते थे।

सरोवर में तड़पती गजिनी को बचाने प्रभु तुम क्यों न आये?

अजेश स्वरूप ब्रह्मचारी

वैसे तो संसार के सभी जीवों का पूजा करना मनुष्य का कर्तव्य है । सनातन धर्म मे सांप को भी नमस्कार किया जाता है । वर्षभर में एक बार कुत्ता और कौवा भी पूजा जाता है । यह कहने की जरूरत नहीं है कि गौमाता और हाथी का तो विशेष स्थान है ही । हाथी जहां से भी निकलते हैं, लोग उन्हें गणेश जी के भाव से प्रणाम करते हैं ।

केरल में ही अभी कुछ वर्ष पहले एक निरीह गौ को कुछ लोगों ने तिरंगे झंडे में लपेटकर काटा था । अब गर्भिणी हथिनी के साथ यह क्रूर कृत्य का समाचार सुनने को मिला है ।

हो सकता है कि सनातन धर्म को क्षुभित करने के लिए यह जानबूझकर किया गया कुकृत्य हो ! तब भी किसी गर्भिणी जीव के साथ किया गया यह महापराध यह सिद्ध करता है कि मानवता दम तोड़ चुकी है । कोई विशेष कष्ट की बात नहीं होगी कि कोरोना या उस जैसी कोई महामारी तथा अन्य प्राकृतिक आपदा संसार भर से मानवमात्र को नष्ट कर उन पशु-पक्षी-किटादियों को अभयता का वरदान दें ; जो अनावश्यक किसी को कष्ट नहीं देते ।

यह थी पूरी घटना

केरल के साइलेंट वैली फॉरेस्ट में एक गर्भवती हथिनी को स्थानीय लोगों ने इस हथिनी को शक्तिशाली पटाखों से भरा एक Pineapple खिला दिया था। ये Pineapple मादा हाथी के मुंह में फट गया। वह बुरी तरह से जख्मी हो गई। मामला 27 May का है। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डेन सुरेंद्र कुमार ने बताया कि पटाखों से भरा Pineapple चबाने के बाद उसका जबड़ा टूट गया था। वह कुछ भी नहीं खा पा रही थी। हथिनी की हत्या करने के लिए ही उसे पटाखों से भरा अनानास खिलाया गया था। इस हथिनी की 27 मई को उत्तरी केरल के Palakkad जिले में वेल्लियार नदी में मौत हो गई। सुरेंद्र कुमार ने कहा वन अधिकारियों को दोषियों को पकड़ने के निर्देश दिए हैं। हथिनी का शिकार करने के लिए हम उन्हें दंडित करेंगे।

देवेन्द्र सिकरवार

कभी एक मूक पशु ने पुकारा था जगन्नियंता को और वे दौड़ पड़े थे उसे बचाने को लेकिन जिस भूमि को स्वयं उन्होंने अपने हाथों से रचा था यह सोचकर कि इस भूमि पर प्रत्येक जीव दूसरे के जीवन के अधिकार की रक्षा करेगा, उसी भूमि पर कल दो निरीह जीवों को तड़पा तड़पा कर अट्टहासों के बीच मौत दे दी गई।

केरल की भूमि अब अभिशापित भूमि बन चुकी है क्योंकि वहाँ अब पढे लिखे पिशाचों की संख्या बढ़ती जा रही है।

पिछले वर्षों में एक भूखे मानसिक दिव्यांग आदिवासी युवक को एक अमनो मुहब्बत के मजहब वाले ने दर्दनाक मौत देकर मिसाल कायम की थी और फिर एक निरीह गाय को सरेआम सड़क पर काटकर अपनी पैशाचिकता का प्रदर्शन करते हुये उसे पकाकर हैवानों ने बोटियाँ नोची थीं और इस वर्ष अब....

पुलिस तफ्तीश करेगी लेकिन अगर मानवता के ये अपराधी मजहब विशेष के शांतिदूत हुये तो नाम कभी भी सामने नहीं आयेंगे पर हाँ, अगर उनके नाम हिंदू किस्म के हुये तो उन्हें अपने किये की सजा अवश्य मिल सकेगी।

वैसे इस बात की संभावना न्यूनतम है कि अपराधियों के नाम कभी भी जाहिर हो सकेंगे। कारण आप जानते हैं।

अब जो भी हो लेकिन 'बलिराजा' शर्म से गड़े हुये हैं कि सुतल लोक से निकलकर 'ओणम' पर केरल का भ्रमण करते समय इस पापी नगरी के लोगों को अपनी प्रजा कैसे कहेंगे?

गरुड़ अपने वेग पर लज्जित हैं कि वे अपने स्वामी को समय

रहते इन मासूम पीड़ित जीवों तक क्यों नहीं पहुंचा सके?

सुदर्शन क्रुद्ध है कि उसे इन नारकीय पिशाचों का शिरोच्छेद करने क्यों नहीं छोड़ा गया?

और स्वयं साक्षात 'विष्णु' भी दुःखी हैं और इस मूक पशु के अपराधी भी कि दो मासूम जानों को वे बचा न सके जिनमें से एक मासूम ने तो अभी संसार में आंखें भी न खोली थीं?

त्रेता युग के 'ग्राह' का कटा सिर विष्णु पर व्यंग्य से मुस्कुरा रहा है और उस सरोवर के किनारे पर सैकड़ों मगरमच्छ सुर में सुर मिलाकर अट्टहास कर रहे हैं।

Yogesh Khanna

केरल जैसे शिक्षित राज्य में एक गर्भवती हथिनी मल्लपुरम की सड़कों पर खाने की तलाश में निकलती है। उसे अनन्नास ऑफर किया जाता है। वह मनुष्य पर भरोसा करके खा लेती है। वह नहीं जानती थी कि उसे पटाख़ों से भरा अनन्नास खिलाया जा रहा है। पटाख़े उसके मुँह में फटते हैं। उसका मुँह और जीभ बुरी तरह चोटिल हो जाते हैं।

मुँह में हुए ज़ख्मों की वजह से वह कुछ खा नहीं पा रही थी। गर्भ के दौरान भूख अधिक लगती है। उसे अपने बच्चे का भी ख़याल रखना था। लेकिन मुँह में ज़ख्म की वजह से वह कुछ खा नहीं पाती है। घायल हथिनी भूख और दर्द से तड़पती हुई सड़कों पर भटकती रही। इसके बाद भी वह किसी भी मनुष्य को नुक़सान नहीं पहुँचाती है, कोई घर नहीं तोड़ती। पानी खोजते हुए वह नदी तक जा पहुँचती है। मुँह में जो आग महसूस हो रही होगी उसे बुझाने का यही उपाय सूझा होगा। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को जब इस घटना के बारे में पता चलता है तो वे उसे पानी से बाहर लाने की कोशिश करते हैं लेकिन हथिनी को शायद समझ आ गया था कि उसका अंत निकट है। और कुछ घंटों बाद नदी में खड़े-खड़े ही वह दम तोड़ देती है।

पढ़े-लिखे मनुष्यों की सारी मानवीयता क्या सिर्फ मनुष्य के लिए ही हैं? ख़ैर पूरी तरह तो मनुष्यों के लिए भी नहीं। हमारी प्रजाति में तो गर्भवती स्त्री को भी मार देना कोई नई बात नहीं।

इन पढ़े-लिखे लोगों से बेहतर तो वे आदिवासी हैं जो जंगलों को बचाने के लिए अपनी जान लगा देते हैं। जंगलों से प्रेम करना जानते हैं। जानवरों से प्रेम करना जानते हैं।

वह ख़बर ज़्यादा पुरानी नहीं हुई है जब अमेज़न के जंगल जले। इन जंगलों में जाने कितने जीव मरे होंगे। ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों ऊँट मार दिए गए, यह कहकर कि वे ज़्यादा पानी पीते हैं। कितने ही जानवर मनुष्य के स्वार्थ की भेंट चढ़ते हैं।

भारत में हाथियों की कुल संख्या 20000 से 25000 के बीच है। भारतीय हाथी को विलुप्तप्राय जाति के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।

एक ऐसा जानवर जो किसी ज़माने में राजाओं की शान होता था आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है। धरती का एक बुद्धिमान, समझदार याद्दाश्त में सबसे तेज़, शाकाहारी जीव क्या बिगाड़ रहा है हमारा जो हम उसके साथ ऐसा सलूक कर रहे हैं?

कोरोना ने हम इंसानों का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। यह बता दिया है कि हमने प्रकृति के दोहन में हर सीमा लाँघ दी है। लेकिन अब भी हमें अकल नहीं आई। हमारी क्रूरता नहीं गई। मनुष्य इस धरती का सबसे क्रूर और स्वार्थी प्राणी है ....

Pooja Gupta

जानवर इंसान तो नहीं बन सकते लेकिन कुछ इंसान अपने कुकृत्यों से जरुर जानवर से भी बदतर बन रहा है। केरल के मल्ल्पुरम में एक गर्भवती हथिनी जो शायद भूखी थी और खाने की तलाश में जंगल से पास के ही गाँव में घूम रही थी तो कुछ लोगों ने उसे अनानास ऑफर किया जिसे हथिनी ने खा लिया पर उसे क्या पता था कि यह मनुष्यता केवल उससे खिलवाड़ करने वाली है और उसने अनानास खा लिया।

वह अनानास उसके मुँह में फट गया जिससे वह बुरी तरह जख़्मी हो गयी और फिर भी उसने किसी भी व्यक्ति या किसी चीज को नुकसान नहीं पहुंचाया और पास के ही एक नदी में जाकर उसने अपना मुँह उसमें डाल दिया ताकि उसे थोड़ी राहत पहुंचे। तीन दिन तक वह उसी नदी में रही और उससे अब कुछ खाया भी नहीं जा रहा था बड़ी ही मुश्किल से ही शायद वह पानी पी पायी हो। जब हाथी की दयनीय स्थिति फॉरेस्ट अफसरों को पता चली, तो वे दो कुमकी हाथियों, सुरेंद्रन और नीलाकंतन को घायल हाथी को वलियार नदी से बाहर निकालने के लिए ले आए।

बड़ी मुश्किल के बाद पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। त्रिशूर के सहायक वन पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ डेविड अब्राहम ने हाथी का पोस्टमॉर्टम किया। उन्होंने कहा कि हथिनी के घाव देखते ही यह साफ हो गया था कि ये जिंदा नहीं बचेगी। उन्होंने कहा कि दो दशकों के अपने करियर में मैंने बहुत से हाथियों के पोस्टमॉर्टम किए लेकिन ये घटना कुछ अलग थी ऐसा पहली बार हुआ था जब भ्रूण को मैं अपने हाथों से पकड़ सकता था।

अब जरा आप सोचिये कि अगर हमारे मुँह में छाले पड़ जाते है तब हमें इतना दर्द होता है और कुछ खा भी नहीं पाते तो जरा उसका दर्द महसूस करके देखिये कि वह किस दर्द से गुजरी होगी और वह भी एक गर्भवती जिसे अपने से ज्यादा अपने बच्चे की फ़िक्र रही होगी वह कुछ खा नहीं सकती थी। उसके बच्चे की क्या हालत हुई होगी और उस हथिनी की क्या हालत हुई होगी। इस तरह का खिलवाड़ कोई कैसे कर सकता है किसी को दर्द देकर कोई कैसे खुश और हँस सकता है।

Posted By: Navodit Saktawat

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