EPF Interest Rates: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employee Provident Fund Organisation) जल्द एक बड़ा फैसला लेने वाला है। जिससे लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स की सेविंग पर असर पड़ने वाला है। दरअसल 4 मार्च को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (Central Board of Trustees) की बैठक श्रीनगर होने जा रही है। इस मीटिंग में ईपीएफओ (EPFO) के वित्त वर्ष 2020-21 के लिए ब्याज दर की घोषणा होने की संभावना है। हाल के विकास में, ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) की ब्याज दर में वित्तीय वर्ष में फिर से कटौती देखी जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह 6 करोड़ से अधिक वेतनभोगी वर्गों के लिए एक बड़ा झटका होगा। EPF सब्सक्राइबर, जो पिछले साल तक अपने ब्याज के पैसे नहीं मिलने से चिंतित थे, अब दूसरे तरीके से प्रभावित होंगे। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए ईपीएफओ ब्याज दरों को कम कर सकती है। बता दें मार्च में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने ब्याज दर को घटाकर 8.5 फीसद कर दिया था। यह पिछले सात साल का सबसे निचला स्तर था। इससे पहले बोर्ड ने कहा कि दो किश्तों में 8.5% ब्याज का भुगतान करेगा। जिसमें ऋण निवेश 8.15 फीसद और इक्विटी 0.35 प्रतिशत है। सूत्रों के मुताबिक, कोरोना संकट के दौरान लोगों ने बड़ी संख्या में ईपीएफ निकासी की, जिसके दौरान प्रोविडेंट फंड कंट्रीब्यूशन का योगदान भी कम हुआ है। जिसके कारण कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने ब्याज दरों को कम करने का फैसला किया है। नई दरों पर फैसला करने के लिए EPFO ​​सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) गुरुवार (4 मार्च) को बैठक करेगा। ऐसे माहौल में ब्याज दरों में कमी आने की संभावना है।

ब्याज दरें 4 मार्च को तय की जाएंगी

वित्तीय वर्ष 2020 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कमाई पर गहरा असर पड़ा है। ज़ी मीडिया से बात करते हुए, EPFO ​​के ट्रस्टी केई रघुनाथन ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि केंद्रीय न्यासी बोर्ड गुरुवार को श्रीनगर में बैठक करेगा (4 मार्च)। उन्हें प्राप्त ई-मेल में ब्याज दरों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 8.5 प्रतिशत ब्याज का भुगतान करने की घोषणा की थी, केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने पहले कहा था कि 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में 8.5 प्रतिशत ब्याज का भुगतान दो किस्तों में किया जाएगा। प्रतिशत निवेश और 0.35 प्रतिशत ब्याज का भुगतान इक्विटी से किया जाएगा।

वित्त वर्ष 2013-14 में सबसे अधिक ब्याज

इससे पहले पीएफ (PF) खाताधारकों को 2018-19 में 8.65% दर से ब्याज मिला था। 2017-18 में 8.55 प्रतिशत ब्याज दर था। 2016-17 में 8.65%, 2015-16 में 8.8 फीसद ब्याज दिया गया था। अब तक सबसे ज्यादा ब्याज 2013-14 में 8.75 फीसद दिया गया था। जबकि 2012-13 में 8.5% ब्याज दर थी।

नेट नए नामांकन बढ़े

पेरोल के आंकड़ों के अनुसार रिटायरमेंट फंड बॉडी ईपीएफओ के साथ नेट नए नामांकन 24% बढ़कर 12.54 लाख हो गए। इससे पहले श्रम और रोजगार मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पेरोल डेटा कस्टमरों के आधार विकास के लिए एक सकारात्मक प्रवृत्ति को उजागर करता है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट 2021 (Budget 2021) के अपने भाषण में घोषणा की थी कि 1 अप्रैल से 2.5 लाख से अधिक भविष्य निधि में कर्मचारी योगदान पर ब्याज लगेगा।

Posted By: Navodit Saktawat

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