EPFO Pension : प्राइवेट सेक्‍टर में जॉब बदलना बड़ी बात नहीं है। कर्मचारी बेहतर वेतन और पोजीशन के लिए अक्‍सर नौकरी बदलते रहते हैं। इसलिए प्राइवेट नौकरी करने वालों का कुछ समय बाद दूसरी कंपनी ज्‍वाइन कर लेना आम बात है। लेकिन जॉब चेंज करते समय पीएफ को लेकर सभी के मन में कुछ सवाल रहते हैं। मसलन, मुझे अपना पीएफ मिल पाएगा या नहीं, क्‍या मैं नई कंपनी में इस पीएफ को ट्रांसफर कर सकूंगा या इसका विड्रावल करके क्‍लोज करना पड़ेगा आदि। आइये ऐसे ही कुछ अहम सवालों के जवाब यहां समझते हैं।

हर कर्मचारी अपने EPF में जमा पैसे को लेकर लगातार अपडेट लेता रहता है। जहां तक नियमों की बात है आयकर विभाग की गाइडलाइन के अनुसार यदि आपने किसी भी कंपनी में रहते हुए EPF में योगदान का 5 साल का समय पूरा किया है तो बाद में पीएफ का पैसा निकालने पर यह विड्रावल आयकर की धारा 10 (12) से पूरी तरह कर मुक्‍त रहेगा। यानी इसमें टैक्‍स की छूट दी गई है। लेकिन यदि आपने EPF में 5 साल के कांट्रीब्‍यूशन को पूरा नहीं किया है तो बेहतर होगा कि आप नई कंपनी में अपना EPF ट्रांसफर कर दें।

ऐसे होता है EPFO पेंशन का कैल्‍क्‍युलेशन

वे कर्मचारी जो नवंबर, 1995 की अवधि के बाद से जॉब कर रहे हैं, उनकी पेंशनभोगी वेतन की गणना होती है। यह गणना EPS की मेंबरशिप से बाहर होने से पहले गत 60 माह में नौकरी की अंशदायी अवधि के दौरान प्राप्‍त किए गए एवरेज मासिक वेतन के रूप में होती है। यहां पर अधिकतम पेंशन के योग्‍य वेतन हर माह 15 हजार रुपए तक सीमित है। EPF फंड में योगदान की जो अवधि है उसके आधार पर ही सदस्‍य की पेंशन योग्‍य नौकरी की गणना होती है।

मान लीजिये कोई कर्मचारी 58 साल की उम्र में रिटायर होता है एवं 20 साल अथवा इससे अधिक समय की सेवा अवधि पूरी करता है तो फिर उसे पेंशन सेवा के तौर पर दो साल बोनस के रूप में दिए जाएंगे। यदि किसी सदस्‍य ने 58 साल की उम्र पूरी कर ली है और तब तक कुल 22 साल तक EPS में योगदान जमा कराया है तो उसकी पेंशन योग्‍य सेवा अवधि इस केस में 24 साल के रूप में मानी जाएगी यानी उसे दो साल बोनस वर्ष के रूप में मिलेंगे।

5 साल की नौकरी में ऐसे बनेगी पेंशन

यदि गत 5 वर्षों की नौकरी में किसी का औसत मासिक वेतन 1 लाख रुपए है तो उसकी मासिक पेंशन 5 हजार 142 रुपए (15,000 x 24/70 रुपये) बनती है। लिहाजा पीएफ एवं निवेश के विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि जब भी कोई कर्मचारी नौकरी बदले तो वह ईपीएफ खाते से पूरा पैसा ना निकाले।

इस वजह से EPF का पूरा पैसा निकालने से बचें

जानकारों का कहना है कि जॉब चेंज करते समय कर्मचारी को भी भी अपना पूरा EPF का पैसा नहीं निकालना चाहिये। जब भी जॉब बदलने की बात आए तो कर्मचारी को अपने EPF के साथ ही पेंशन योजना की राशि को ट्रांसफर करना सर्वथा उचित है। कोई एक EPS मेंबर अपने पीएफ खाते में अपने योगदान के 10 वर्ष संपूर्ण होने पर एवं 58 वर्ष की आयु के रिटायरमेंट की तय आयु पूरी कर लेता है तो वह अपने आप ही पेंशन की पात्रता हासिल कर लेता है। यदि कोई कर्मचारी 58 साल की उम्र पूरी करने से पहले ही सेवामुक्‍त या सेवानिवृत्‍त हो जात है लेकिन इस समय भी उसका कम से कम 10 साल का योगदान जमा है तो ऐसे में वह EPS के नियमों के तहत पेंशन पाने का पूरा-पूरा हकदार होगा।

Posted By: Navodit Saktawat

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