केंद्र सरकार ने लोगों को लॉकडाउन में राहत देने के लिए फैसला लिया था कि सभी तरह के कर्मचारियों का PF अंशदान 12 प्रतिशत की बजाय 10 प्रतिशत ही कटेगा। इसके बाद लोगों के हाथ में आने वाली सैलरी में तो बढ़ोतरी हो जाएगी लेकिन EPF बचत में कमी आई है। सरकार द्वारा की गई घोषणा के अनुसार मई, जून और जुलाई महीने के लिए सरकार ने EPF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की तरफ से दिया जाने वाला अंशदान 12 की बजाय 10 प्रतिशत करने का ऐलान किया है।

अब अगर कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान को देखा जाए तो कर्मचारी का 12 प्रतिशत पूरा योगदान उसकी बचत में जाता है वहीं नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला योगदान कर्मचारी की पेंशन में भी जाता है। EPFO द्वारा दी जाने वाली पेंशन EPS में नियोक्ता की तरफ से दिया जाने वाला योगदान 8.33 प्रतिशत होता है। सरकार के इस कदम के बाद असमंजस इसी पेंशन की रकम को लेकर था।

हालांकि, EPFO ने हाल ही में नई नियमों को लेकर FAQ जारी किए हैं जिसमें पेंशन अंशदान को लेकर सफाई दी गई है। इसमें साफ कहा गया है कि मई से जुलाई के बीच कटने वाले 10 प्रतिशत अंशदान की वजह से पेंशन वाले हिस्से पर कोई असर नहीं होगा। इसका मतलब है कि इन तीन महीनों में भी पेंशन अंशदान 8.33 प्रतिशत ही होगा।

इसका मतलब है कि अगर आपके भी पीएफ खाते में मई से जुलाई के बीच आपका और नियोक्ता का अंशदान 24 प्रतिशत की बजाय केवल 20 प्रतिशत ही जाता है तो चिंता ना करें क्योंकि इससे आपके पेंशन की राशि और उस पर मिलने वाले फायदों पर असर नहीं होगा।

Posted By: Ajay Kumar Barve

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