कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)ने पीएफ अकाउंट की सिक्योरिटी सख्त कर दी है। अब बिना मूल डॉक्यूमेंट के कर्मचारियों के खातों का ब्योरा बदला नहीं जाएगा। किसी भी बदलाव से पहले ईपीएफओ प्रमाण पत्रों का निरीक्षण करेगा। उसके बाद ही किसी तरह का चेंज हो सकेगा। इसके साथ ईपीएफओ (EPFO) ने पीएफ खाते से भुगतान पर भी पाबंदी लगा दी है। नियोक्ता को अंशधारकों केवाईसी में ऑरिजनल पेपर बदलाव की एडवाइजरी जारी की है। पीएफ खाते को लेकर केवाईसी के नाम पर फ्रॉड कर पैसे निकालने के मामले सामने आ रहे हैं। इससे निपटने के लिए ईपीएफओ ने नियम को सख्त करने का फैसला लिया है। कानपुर हेड ऑफिस के क्षेत्रीय आयुक्त सलिल शंकर ने बताया कि नए निर्देश जारी हो गए। वहीं सभी आयुक्तोंं को एडवाइजरी दी है कि केवाईसी के बदलाव में लापरवाही ना करें। नियोक्ता सभी डॉक्यूमेंट्स को अच्छे से देखने के बाद ही कोई बदलाव करें। यह नियम ऑफलाइन और ऑनलाइन मान्य होगा।

क्या है यह बदलाव?

ईपीएफओ के नए नियम में अब नाम के पहले अक्षर को फुल फार्म में बदल सकते है, लेकिन केवाईसी के नाम पर पूरा बदला नहीं जा सकेगा। जैसे किसी का नाम केवी बोहरा है, तो अपना नाम करन वीर बोहरा कर सकता है। लेकिन नाम राहुल बोहरा नहीं कर सकते। ऐसा करने पर विभाग अकाउंट पर रोक लगा सकता है। केवाईसी की पूरी जानकारी देने के बाद रकम दी जाएगी।

ईपीएफओ की ब्याज दर पर चार मार्च को फैसला संभव

चालू वित्त वर्ष के लिए पीएफ खाताधारकों को कितना ब्याज दिया जाए, इस बारे में चार मार्च को फैसला हो सकता है। उस दिन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के ट्रस्टी बोर्ड की श्रीनगर में बैठक होने वाली है। ईपीएफओ के एक ट्रस्टी केई रघुनाथन ने कहा कि उन्हें श्रीनगर में चार मार्च को ट्रस्टी बोर्ड की प्रस्तावित बैठक की सूचना सोमवार को दी गई है। इस बैठक का एजेंडा भी जल्द मिलने की उम्मीद है। हालांकि सूचना में इसका जिक्र नहीं है कि चालू वित्त वर्ष के लिए ब्याज पर फैसला होगा या नहीं। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि चालू वित्त वर्ष के लिए ईपीएफओ ब्याज दरों में कमी कर सकता है। इसके पीछे तर्क यह है कि कोरोना संकट के दौर में खाताधारकों ने पीएफ से बड़ी रकम की निकासी की है। दूसरी तरफ, बड़ी संख्या में नौकरियां जाने से ईपीएफओ में जमा की जाने वाली रकम भी घटी है। पिछले वित्त वर्ष (2019-20) के लिए ईपीएफओ ने 8.5 फीसद ब्याज दर घोषित की थी, जो सात वर्षों का निचला स्तर था। इन सात वर्षों में सबसे ज्यादा ब्याज दर वित्त वर्ष 2015-16 के लिए 8.8 फीसद थी।

Posted By: Navodit Saktawat