नई दिल्ली। होली के आते ही हर शहर के बाजार अबीर और गुलाल सहित तरह-तरह के रंगों से भर जाते हैं। इस खास त्योहार पर लोग गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे को रंग लगाते और गले मिलते हैं। वक्त के साथ होली खेलने का तौर-तरीका भी काफी बदल गया है लोग केमिकल युक्त कलर से दूरी बनाते हुए हर्बल और नेचुरल कलर को अपना रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि, मार्केट में जो कलर आपको हर्बल या नेचुरल बताकर दिया जा रहा है उसमें भी केमिकल मिला होता है। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए विशेषज्ञों ने एक चेतावनी जारी की है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जो हर्बल गुलाल आप खरीद रहे हैं, जरूरी नहीं है कि उसमें केमिकल टॉक्सिक ना मिला हो। इन रंगों का दाम सिंथेटिक रंगों से तीन गुना अधिक होता है। सिंथेटिक कलर में कई खतरनाक धातु मिली होती हैं जैसे, लीड, क्रोमियम, कैडमिअम, निकेल, मर्करी, जिंक और लोहा। गुलाल में धातु मिलाई गई है या नहीं इसे एक टेस्ट के माध्यम से जाना जाता है।

स्किन, लिवर और आंखों को प्रभावित करते हैं ये रंग

जांच में पता चला है कि लाल रंग में सबसे अधिक मात्रा में मर्करी मिला होता है। ये केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इसी तरह नीले रंग में कॉपर मिला होता है, जो आंख, त्वचा, लिवर और श्वसन प्रणाली के लिए नुकसानदायक होता है। इन धातुओं के अलावा रंगों में सिलिका और एसबेस्टस भी मिला होता है, जो शरीर के टीशू को प्रभावित करते हैं। सेहत का ध्यान रखते हुए इस बात का ध्यान रखना जरूर है कि, रंग एक अच्छे बाजार से खरीदा जाए। खुले में बिक रहे रंग न खरीदें। दुकानदारों का कहना है कि बाजार में हर्बल रंगों की मांग बढ़ गई है। इसे देखते हुए वह भी अधिक मात्रा में इन्हें बेचने के लिए लेकर आए हैं।

यहां से आते हैं रंग

इस बारे में एक दुकानदार का कहना है कि व्यापार के लिए सिंथेटिक रंग काफी अच्छा होता है। इसका दाम भी बेहद कम होता है। जहां आम गुलाल 30-40 रुपये प्रति किलो मिलता है, वहीं हर्बल रंग का दाम 200 रुपये प्रति किलो है। इस तरह अगर स्प्रे की बात करें तो वो अधिकतर चीन से ही आते हैं। इसके साथ ही खुला रंग पश्चिमी उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ आदि से आता है। बाल विकास से संबंधित एक एनजीओ खुद ही ऑर्गेनिक कलर बनाता है। इन ऑर्गेनिक रंगों को फूलों आदि से बनाया जाता है।

सिंथेटिक कलर में मिली होती है खतरनाक धातु

सिलवर और गोल्ड रंग के जैल भी बाजार में मिल रहे हैं। इसके अलावा छोटे दवाई जैसे कैप्सूल भी मिलते हैं। जैल की कीमत 40 रुपये होती है जबकि कैप्सूल 20 रुपये में ही मिल जाता है। सिंथेटिक कलर में कई खतरनाक धातु मिली होती हैं जैसे, लीड, क्रोमियम, कैडमिअम, निकेल, मर्करी, जिंक और लोहा। गुलाल में धातु मिलाई गई है या नहीं इसे एक टेस्ट के माध्यम से जाना जाता है।

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