नई दिल्ली। खराब मानसून की दस्तक ने किसानों के साथ-साथ बाजार को भी सिहरा दिया है। पिछले मानसून की बेरुखी और रबी सीजन में बेमौसम बारिश की मार के बाद खराब मानसून की खबर के बाद शेयर बाजार को भरभराते देर नहीं लगी। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने तो इस विषम परिस्थिति से सरकार को निपटने की चेतावनी दे डाली। इसके बाद तो शेयर बाजार में अफरातफरी मच गई। सूखे जैसी स्थिति की आशंका के बाद कृषि मंत्रालय अपनी आपात योजना की समीक्षा में जुट गया।

रिजर्व बैंक ने सरकार से ऐसे हालात से निपटने के लिए आकस्मिक आपात योजना तैयार रखने को कहा है। कमजोर मानसून की वजह से कम खाद्यान्न उत्पादन के प्रभाव से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि अप्रैल में महंगाई के लिए जोखिम की पहचान की गई है। लगातार दूसरे वर्ष कमजोर मानसून के पूर्वानुमान की वजह से यह संकट बन सकती है।

मानसून के विफल होने की हालत में महंगाई के इस अंदेशे से निपटने के लिए मजबूत खाद्य प्रबंधन पर जोर देने की सलाह दी गई है। विस्तृत आर्थिक स्थिति के बारे में रिजर्व बैंक ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियां नरम बनी हुई हैं। मार्च में देश के ज्यादातर हिस्सों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कृषि क्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा निराशाजनक है।

महंगाई हो सकती है बेलगाम

पिछले दो सीजन से खराब मौसम ने खेती की हालत खराब हुई है। पैदावार में गिरावट आई। खासतौर पर दलहन व तिलहन फसलों के कम उत्पादन से बाजार में इनकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। आगामी खरीफ के खराब होने की दशा में इन दोनों जिंसों की स्टॉक और घट सकता है। इससे महंगाई बेलगाम हो सकती है।

तैयारी में जुटा कृषि मंत्रालय

मौसम के पूर्वानुमान और शेयर बाजार में तेज गिरावट के बीच कृषि मंत्रालय आपात योजना की समीक्षा में जुट गया। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह खुद मंत्रालय के आला अफसरों और मौसम विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने हालात की जानकारी ली।

इस बारे में उन्होंने बताया कि मानसून के कमजोर होने की दशा को भांपकर देश के 580 जिलों को आकस्मिक योजना भेज दी गई है। राज्यों के अफसरों के साथ बैठकें चल रही हैं। सरकार की ओर से पिछली बार के मुकाबले और भी पुख्ता तैयारी की जा रही है।

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