कोलकाता। मौसम विभाग अक्सर मौसम खराब होने पर मछुआरों को समुद्र में ना जाने की चेतावनी देता रहता है। ऐसी ही बंगाल की खाड़ी में तूफान की चेतावनी के बावजूद चार जुलाई को कुछ मछुआरे गहरे समुद्र में चले गए। मौसम ने भी अपना रंग दिखाया और यह लापता हो गए। लापता हुए इन मछुआरों में से बाकि को तो पता नहीं लेकिन एक मछुआरे को बुधवार को सुरक्षित निकाल लिया गया।

बचाए गए मछुआरे का नाम रवींद्रनाथ दास है और उसके जिंदा बचने की कहानी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। इस मछुआरे ने तुफान में फंसने के बाद खुद को भूखा प्यास होने के बावजूद पांच दिन तक तैरकर जिंदा रखा है। इसे अब बांग्लादेश के चट्टगांव अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रवींद्रनाथ ने बताया कि उसने पांच दिनों तक बिना जीवनरक्षक जैकेट के भूखे-प्यासे गहरे समुद्र में तैर कर अपनी जान बचाई है। बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में बुधवार सुबह 11 बजे समुद्र से गुजर रहे एक जहाज में सवार लोगों की नजर पड़ी तो रवींद्रनाथ को बचाया गया। अभी भी 24 मछुआरों को पता नहीं चल पाया है। वेस्ट बंगाल यूनाइटेड फिशरमेन एसोसिएशन के सचिव बिजोन माइती ने बताया कि लापता मछुआरे दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप के रहने वाले हैं।

इंग्लिश चैनल विजेता ने बताया चमत्कार

इंग्लिश चैनल विजेता तैराक बुला चौधरी ने रवींद्रनाथ की बरामदगी को चमत्कार बताया है। उन्होंने बताया कि जब वह इंग्लिश चैनल पार करने के लिए तैरती हैं तो उनकी मदद के लिए सभी सुविधाओं से युक्त एक जहाज पीछे-पीछे चलता है। खाने-पीने को दिया जाता है। रवींद्रनाथ बिना खाए-पीए पांच दिनों तक समुद्र में तैरते रहे, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया है। उन पर भगवान की अपार कृपा है। मैं रवींद्रनाथ को सलाम करती हूं।

प्रशासन की ओर से दो महीने तक मछुआरों को समुद्र में जाने से मना किया गया था। बावजूद इसके चार जुलाई को चार ट्रॉलर (समुद्री नाव) एफबी दसभुजा, एफबी बाबाजी, एफबी जय जोगीराज और एफबी नयन में सवार कुल 61 मछुआरों का एक दल बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने रवाना हुआ था।

Posted By: Ajay Barve