नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार को 88 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। वो अल्जाइमर नाम की बीमारी से पीड़ित थे और दिल्ली के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

दिग्गज नेता के निधन के बाद उनके करीब रहीं समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली ने बताया, जॉर्ज फर्नांडिस की इच्छा थी कि हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया जाए, लेकिन जीवन के आखिरी पलों में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें दफनाया जाए। इसलिए हम पहले उनका अंतिम संस्कार करेंगे और फिर अस्थियों तथा राख को दफनाएंगे, ताकि उनकी दोनों इच्छाएं पूरी हो सकें।

जॉर्ज फर्नांडिस श्रमिक संगठन के भूतपूर्व नेता, तथा पत्रकार थे। वे राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य रह चुके थे और उन्होंने समता पार्टी बनाई थी। फर्नाडीस बिहार के मुजफ्फरपुर से सांसद रहे और केंद्र में मंत्री भी रहे।

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वे आखिरी बार 2009 से 2010 के बीच राज्यसभा सांसद रहे थे। वे 1998 से 2004 तक की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की केन्द्रीय सरकार में रक्षा मंत्री थे।

जॉर्ज फर्नांडिस के ही कार्यकाल में पोखरण परीक्षण और कारगिल युद्ध हुआ था। 3 जून 1930 को जन्में जॉर्ज फर्नांडिस को 1946 में बैंगलोर में संत बनने के लिए भेजा गया था लेकिन वे वहां से 1949 में मुंबई आ गए और ट्रेड यूनियन के नेता बन गए।

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उन्होंने 1967 में उन्होंने दक्षिण मुंबई से कांग्रेस नेता एसके पाटिल को संसदीय चुनाव में हराया था। इमरजेंसी के बाद 1977 में एक बार फिर वे संसदीय चुनाव जीते लेकिन इस बार वे मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़े थे। केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने निवेश के उल्लंघन के कारण, अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों आईबीएम और कोका-कोला को देश छोड़ने का आदेश दिया था।

वह 1989 से 1990 तक रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कोंकण रेलवे परियोजना के पीछे प्रेरणा शक्ति थे।

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