Gadge Maharaj Birth Anniversary 2020: संत गाडगे बाबा उर्फ डेबूजी महाराज की आज जयंती है। उनका जन्म 23 फरवरी 1876 महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेणगांव अंजनगांव में एक धोबी परिवार में हुआ था। समाज सुधारक और घुमक्कड भिक्षुक गाडगे बाबा ने नशाखोरी, छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों का प्रबल विरोध किया। उन्होंने मजदूरों और किसानों के शोषण के खिलाफ भी आवाज उठाई।

गाडगे बाबा ने भीख मांगकर महाराष्ट्र के कोने-कोने में अनेक धर्मशालाएं, गौशालाएं, विद्यालय, चिकित्सालय तथा छात्रावास बनवाए। संत गाडगे महाराज द्वारा स्थापित 'गाडगे महाराज मिशन' आज भी 12 धर्मशालाओं, 31 कॉलेज व स्कूलों, छात्रावासों आदि संस्थाओं का संचालन करता है। गाडगे बाबा अनपढ़ थे, लेकिन बुद्धिमान थे। वह शिक्षा के महत्व को समझते थे, इसलिए उन्होंने विद्यालयों का भी निर्माण करवाया।

मगर, उनकी निजी संपत्ति के रूप में उनके पास एक लकड़ी, फटी हुई चादर और मिट्टी का एक बर्तन और एक ढपली थी। इसी के कारण गाडगे बाबा को चीथड़े-गोदड़े वाले बाबा के नाम से भी पुकारा जाता था। गाडगे बाबा का मानना था कि भूखों को भोजन, प्यासे को पानी, नंगे को वस्त्र, अनपढ़ को शिक्षा, बेकार को काम, निराश को ढाढस और मूक जीवों को अभय प्रदान करना ही भगवान की सच्ची सेवा होती है। वे कहते थे ईश्वर तीर्थस्थानों, मंदिरों और मूर्तियों में नहीं, मानव समाज में विद्यमान है।

दरअसल, गाडगे बाबा जब किसी गांव में जाते थे, तो गटर और रास्तों को साफ करने के बाद खुद लोगो को गांव की सफाई होने की बधाई देते थे। इसके बदले में गांव के लोग उन्हें पैसे देते थे, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपने लाभ के लिए न करके सामाजिक कार्यों के लिए किया। अमरावती जाने के दौरान 20 दिसंबर 1956 को रास्ते में उन्होंने अपनी देह त्याग दी थी। उनके सम्मान में महाराष्ट्र सरकार ने 2000-01 में 'संत गाडगेबाबा ग्राम स्वच्छता अभियान' की शुरुआत की थी। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है, जो अपने गांवों को स्वच्छ रखते हैं।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai