राजकुमार श्रीवास्तव, प्रयागराज। गंगा की निर्मलता को लेकर तमाम राजनीतिक पार्टियों, सामाजिक संगठनों की ओर से अक्सर हाय-तौबा मचाई जाती है, लेकिन संगम नगरी में कुंभ मेले के दौरान गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए किए गए सरकारी इंतजाम की वजह से प्रदूषण की मात्रा नहीं बढ़ पाई है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हालिया रिपोर्ट भी यही गवाही दे रही है। प्रयागराज से गंगा यात्रा शुरू करने के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने भी सोमवार को यहां आचमन किया। हालांकि, जलस्तर कम होने से 'मोक्षदायिनी' का दायरा पहले की तुलना में सिमटने लगा है।

गंगा और यमुना नदियों में गिरने वाले करीब तीन दर्जन नालों के पानी का शोधन गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा बायो रेमिडियल और माड्यूलर तकनीक से कुंभ के पहले से कराया जा रहा है। गंगा में प्रदूषण की मात्रा यानी बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) की नियमित जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रतिदिन चार स्थानों पर पानी की सैंपलिंग कराई जा रही है।

यह प्रक्रिया 31 मार्च तक चलेगी। 10 दिन पहले प्रदूषण की मात्रा बढ़ी थी, लेकिन हालिया रिपोर्ट में प्रदूषण की मात्रा एक जगह छोड़ दी जाए तो अन्य स्थानों पर कुंभ मेले के दौरान जैसी है। जलस्तर जरूरी आधा मीटर से ज्यादा कम हो जाने से फाफामऊ, दारागंज क्षेत्रों में जगह-जगह धाराओं के बीच बालू के रेत उभर आए हैं।

किस दिन कहां प्रदूषण की कितनी मात्रा

तिथि स्थल बीओडी (मिलीग्राम प्रति लीटर में)

26 फरवरी रसूलाबाद घाट 3.2

शास्त्री ब्रिज 3

छतनाग घाट 3

सरस्वती घाट 2.4

पांच मार्च रसूलाबाद घाट 3.2

शास्त्री ब्रिज 3.2

छतनाग घाट 3.3

सरस्वती घाट 2.3

12 मार्च रसूलाबाद घाट 3.1

शास्त्री ब्रिज 3.3

छतनाग घाट 3

सरस्वती घा 2.4

'गंगा जल की नियमित मॉनीटरिग 31 मार्च तक होती रहेगी। इसकी गुणवत्ता पर अभी कोई असर नहीं पड़ा है। जल काफी स्वच्छ है।' -एसके मिश्रा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

मेले के दौरान जलस्तर 76.80 से लेकर 77 मीटर तक रहता था। लेकिन इधर करीब आधा मीटर जलस्तर कम हुआ है। हालांकि, कानपुर से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्तर सही हो जाएगा। -विनय कुमार त्रिपाठी, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग (बाढ़ प्रखंड)।

Posted By:

fantasy cricket
fantasy cricket