Ghost stories: उत्तराखंड राज्य प्राकृति से सराबोर है यहां नदियां, पहाड़, पेड़-पौधे खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। लेकिन इस खूबसूरत जगह में एक ऐसी जगह भी है, जहां पर लोगो को जाने से डर लगता है। दरअसल लैंसडौन का नाम तो आपने भी सुना होगा। यह जगह लोगो के घूमने के लिए फेवरिट अड्डा है, यहां आने पर काफी शांति का अनुभव होता है। शहर के शोर-शराबे से दूर प्राकृति के बीच लोग यहां पर आना पसन्द करते हैं। लेकिन अब इस जगह पर ऐसी घटनाएं सामने आ रही है कि आप भी यहां जाने से पहले 10 बार सोचेगें।

दरअसल दिल्ली से 200 किलोमीटर दूर उत्तराखंड राज्य की एक छोटी सी जगह लैंसडौन की सड़कों पर लोग अब घूमने से डरते हैं क्योकि यहां पर एक सिर कटा भूत घूमता है। सिर कटे भूत की कहानी लैंसडौन के हर घर में सुनने को मिलती है। इसे लेकर ऐसा कहा जाता है कि आधी रात को यहां पर कैंटोनमेंट एरिया में एक सिर कटा अंग्रेज अपने घोड़े पर घूमता है और वह सिर्फ घूमता ही नहीं बल्कि इस पूरे एरिया की चौकीदारी भी करता है। ये कहानी सुनकर आपको थोड़ा अजीब तो लगता होगा लेकिन यहां के रहवासी इस सिर कटे अंग्रेज के भूत से काफी डरते हैं।

इस कहानी के अनुसार अंग्रेज का यह भूत यहां रात के समय ड्यूटी करने वाले सिपाहियों पर नजर रखता है, इतना ही नहीं अगर कोई सोता हुआ दिखाई देता है तो उसकी तो फिर खैर नहीं। कई सिपाहियों ने तो इस बात को भी माना है कि उन्हें रात में कई तरह की अजीब-अजीब अवाजें सुनाई देती हैं। बहुत से सिपाही इस सिर कटे भूत से इतना ज्यादा डरे हुए हैं कि वह अपनी ड्यूटी रात को लगवाना नहीं चाहते एवं रात को अगर लग भी जाती है तो वह डर-डर के यह रात गुजारते हैं। कुछ लोगो का कहना है कि अंग्रेज ऑफिसर का अंतिम संस्कार नहीं किया गया था इस वजह से 100 साल के बाद भी इसकी आत्मा कैंट में घूमती रहती है।

किस अंग्रेज का है ये भूत

इस जगह में भूत को लेकर ऐसे कई रिटायर्ड सिपाही भी हैं जो इस सिर कटे भूत को होने की पुष्टि करते हैं। उन्होनें इस भूत को कई बार महसूस भी किया है। जो भी सिपाहि ड्यूटी पर लापरवाही बरतता है उसके सिर पर यह भूत मारता है। बहुत से लोगो का यह भी कहना है कि इस भूत के डर से लैंसडौन में अपराध भी न के बराबर होते हैं। इस सर कटे भूत की अगर बात करें तो ऐसा बताया जाता है कि यह एक अंग्रेज का भूत है जो एक ब्रिटिश आर्मी ऑफिसर डब्लू. एच. वार्डेल का है। वार्डेल सन् 1893 में भारत आया था। यहां पर उसे लैंसडौन कैंट का कमांडिंग ऑफिसर बनाया गया था।

कैसे हुई थी इस अंग्रेजी अफसर की मौत

वार्डेट को 1901-02 में अफ्रीका मेें तैनात किया गया था उसके बाद वह भारत आए। जब प्रथम विश्व युध्द हो रहा था तब वह लैंसडौन में ही ड्यूटी कर रहे थे। लेकिन प्रथम विश्व युध्द के दौरान वार्डेल फ्रांस में जर्मनी के खिलाफ लड़ते हुए मारे गए। चैंकाने वाले बात तो यह है कि भारतीय सैनिक दरबान सिंह नेगी के साथ लड़ने वाले इस ऑफिसर की लाश कभी नहीं मिली थी। जब उनकी मौत हुई थी तो ब्रिटिश अखबारों में लिखा गया कि वो एक शेर की तरह लड़े और शहीद हो गए।

Posted By: Arvind Dubey

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