नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि बंद हो चुकी जेट एयरवेज के पूर्व कर्मचारियों को रोजगार प्रदान करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। नागरिक विमानन राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा को बताया कि एक पोर्टल खोला गया है जो कि इन कर्मियों को नए रोजगार तलाशने में मदद करेगा। पुरी ने कहा कि जहां तक पोर्टल का संबंध है, वह काम कर रहा है और वह कर्मचारियों व विभिन्न् एयर लाइनों के हिस्सेदारों को एक-दूसरे से जोड़कर दोनों के लिए अवसर प्रदान कर रहा है। कई कर्मचारी इस पोर्टल का उपयोग कर रहे हैं तो कई को अन्यत्र रोजगार मिल गया है। पुरी ने फिर स्पष्ट किया कि जो जिम्मा एयर लाइन प्रबंधन का है, वह सरकार नहीं उठा सकती। प्रबंधन का काम है कि वह एयर लाइन का संचालन करता रहे। जेट एयरवेज का मामला एनसीएलटी के समक्ष है और मैं वह क्या करेगा, इसका पूर्वानुमान नहीं लगा सकते। केंद्रीय मंत्री ने यह बात आप सांसद संजय सिंह के सवाल के जवाब में कही।

17 अप्रैल को बंद हुई

ज्ञात हो कि उद्योगपति नरेश गोयल के नेतृत्व वाली जेट एयरवेज 17 अप्रैल को वित्तीय संकट के चलते बंद हो गई है। उस वक्त वह देश की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की एयर लाइन थी। उसमें करीब 18 हजार कर्मचारी काम करते थे। कंपनी के खिलाफ उसके कर्जदाताओं ने दिवालिया संहिता के तहत एनसीएलटी में कार्यवाही शुरू की है।

एयर इंडिया के कर्मचारियों के हितों का संरक्षण होगा

एक अन्य पूरक सवाल के जवाब में विमानन राज्यमंत्री पुरी ने कहा कि सरकारी एयर लाइन एयर इंडिया के कर्मचारियों के हितों का संरक्षण होगा और इसके निजीकरण से किसी की नौकरी का नुकसान नहीं होगा। सरकार अपने सारे कर्मचारियों के लिए निष्पक्ष डील करेगी। उन्होंने उन खबरों को भी खारिज किया कि एयर इंडिया के कई पायलट एयर लाइन छोड़ रहे हैं, क्योंकि उनके वेतन का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। अब तक किसी इस्तीफे की सूचना मुझे नहीं मिली है।

Posted By: Navodit Saktawat