कपूरथला। अब तक आपने सुना होगा कि सोने की चेन किसी महिला के लिए चानलेवा हो गई हो क्योंकि अपनी चेन की वजह से वह लूटेरों के निशाने पर आ गई। लेकिन, क्य कभी सुना है कि किसी महिला की जान उसकी सोने की चेन की वजह से बच गई। ऐसा ही मामला कपूरथला में सामने आया है जहां एक महिला के गले में पड़ी सोने की चेन ने उसकी जान बचा ली।

जानकारी के अनुसार कपूरथला के गांव काला संघिया में एक महिला को मृत मानकर यहां स्थित बाबा नंद चंद मृतक देह संभाल घर में रखी गई। लेकिन महिला की देह में पांच घंटे बाद प्राण लौट आए। महिला ने पानी पिया और फिर आंखें खोली। यह चमत्कार देखकर मोर्चरी के सेवादार ने महिला के परिवार वालों को फोन किया तो वह उसे सिविल अस्पताल ले गए। हालांकि बुधवार को महिला की मौत हो गई और परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया।

पुलिस चौकी काला संघिया के इंचार्ज एएसआई ठाकुर सिह और बाबा नंद चंद मृतक देह संभाल घर के सेवादार गुरदीप सिह ने बताया कि मंगलवार बाद दोपहर करीब ढाई बजे 65 वर्षीय प्रवीण कुमारी ब्रह्माा दत्त निवासी गांव जल्लोवाल का शरीर परिजन मोर्चरी के फ्रीजर में रख गए। उन्होंने बताया कि प्रवीण कुमारी को कुछ दिन पहले जालंधर के पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (पिम्स) में दाखिल करवाया गया था, जहां उनकी मौत हो गई।

परिजन शरीर को काला संघिया की मोर्चरी के फ्रीजर में रख गए थे। कुछ समय बाद परिजनों को याद आया कि माता के गले में सोने की चेन थी, जिसे उतारा नहीं गया है। सोने की चेन के लिए परिवार वाले शाम को मोर्चरी आए। मोर्चरी के सेवक गुरदीप सिह ने शाम करीब सात बजे फ्रीजर खोला तो शरीर में हरकत हो रही थी और सांसें भी चल रही थीं। इसके बाद फ्रीजर का दरवाजा खोल दिया और माता को अपने हाथों से पानी पिलाया। इस पर परिजनों को बताया तो वह हैरान रह गए।

गुरदीप सिंह ने बताया कि महिला की आंखों पर लगाई पट्टी खोल दी गई तो उसने आंखें खोल लीं। करीब आठ बजे परिवार वाले महिला को सरकारी अस्पताल कपूरथला ले गए। हालांकि बाद में महिला की मौत हो गई और बुधवार को परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया।

सिविल अस्पताल में दाखिल करने के दौरान चल रही थी नब्ज : डॉ. परमिंदर

सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उक्त महिला को मंगलवार रात करीब सवा नौ बजे परिजन अस्पताल लेकर आए थे। उस समय मामूली नब्ज चल रही थी। ड्यूटी पर तैनात डॉ. परमिदर सिह ने कहा कि महिला की नब्ज चल रही और उसे ऑक्सीजन भी लगाई गई थी। बुधवार तड़के बिना बताए महिला को परिजन ले गए।

पिम्स में महिला को नहीं करवाया गया था दाखिल : अमित सिंह

उधर पिम्स जालंधर के रेजीडेंट डायरेक्टर अमित सिह का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई केस नहीं आया है। अस्पताल का स्टाफ ऐसे किसी मरीज को नहीं भेजता कि वह जीवित हो और उसे मृत घोषित कर दिया जाए। पिम्स में बकायदा पूरी कार्रवाई के बाद ही शव को रिलीज किया जाता है।

Posted By: Ajay Barve