आम जनता, कारोबारियों, कर्मचारियों के लिए यह अच्‍छी खबर हो सकती है कि कोरोना संकट के चलते उपजे आर्थिक संकट के दौरान अभी केंद्र सरकार ने राहत पैकेज के विकल्‍प खुले रखे हैं। लॉकडाउन के बाद सरकार ने क्रमबद्ध रूप से आर्थिक पैकेज का ऐलान भी किया था और बहुत सारी सरकारी योजनाओं में जनता के लिए सारे नियमों में ढील दे दी थी। अब त्‍योहारों के समय भी जनता को उदास होने की जरूरत नहीं है। कोरोना संक्रमण से प्रभावित अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने अपने सभी विकल्प खुले रखे हैं। सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार फिर से यह संकेत दिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने दूसरे आर्थिक राहत पैकेज के लिए अपने विकल्प बंद नहीं किए हैं। वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह की किताब "पोट्रेट ऑफ पावर" के विमोचन के अवसर पर सीतारमण ने कहा कि जीडीपी में गिरावट का मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है और इस संबंध में उन्हें जानकारी भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कराए जा रहे मूल्यांकन के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है।

अर्थव्यवस्था में खपत एवं मांग बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से हाल ही में एलटीसी पैकेज और सभी केंद्रीय कर्मचारियों को फेस्टिव एडवांस देने का फैसला किया गया। वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक इससे अर्थव्यवस्था में एक लाख करोड़ की मांग का सृजन हो सकता है। इस साल मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन की घोषणा के बाद गत मई में सरकार की तरफ 21 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई थी।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार को लोगों के हाथ में सीधे नकदी देने की जरूरत है। उद्योग संगठन भी सरकार से दूसरे राहत पैकेज की मांग कर चुके हैं। हालांकि सरकार कह रही है कि वह अब और कर्ज लेने की स्थिति में नहीं है। चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार 12 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेगी।

Posted By: Navodit Saktawat

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