नई दिल्ली। मकान मालिक और किरायएदार के झगड़ों को निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने नए कानून की तैयारी कर ली है। इसके बाद अब ना सिर्फ मकान मालिक पर कानून का पहरा बल्कि किराएदार की मनमानी पर भी शिकंजा कसेगा। नए कानून के लिए बनाए गए ड्राफ्ट के तहत यह प्रावधान है कि मकान मालिक किराये की अवधि के दौरान अपनी मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। वहीं मकान मालिक को घर के जायजा, रिपेयर से जुड़े काम या किसी दूसरे मकसद से आने के लिए 24 घंटों का लिखित नोटिस एडवांस में देना होगा।

इसके अलावा अब किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद का निपटारा 60 दिन के भीतर हो जाएगा। इसके लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने यहां स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित करेंगे। इतना ही नहीं, किरायेदार और मकान मालिक के बीच का विवाद सिविल कोर्ट में नहीं जाएगा जहां मामला वर्षों तक चलता रहता है। केंद्र सरकार ने किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद को सुलझाने के लिए एक नए कानून का प्रस्ताव किया है। माना जा रहा है कि केंद्र के इस कानून से मकान मालिकों के साथ -साथ किरायेदारों के हितों की भी रक्षा होगी।

नए कानून से उम्मीद है कि मकान मालिक अपने खाली फ्लैट या मकान किराये पर देने से नहीं डरेंगे। सरकार के इस कदम का उद्देश्य देश में भवनों के किराये का नियमन करना है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 2019 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए इस संबंध में नए कानून की घोषणा की थी।

मकान खाली न करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान

केंद्र के नए कानून के प्रस्ताव के मुताबिक मकान मालिक या भूस्वामी किराये की समीक्षा करने से पहले तीन महीने का लिखित नोटिस देगा। प्रस्तावित कानून जिला कलेक्टर को किराया प्राधिकार के तौर पर नियुक्त करने और निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक रहने पर भारी जुर्माना लगाए जाने की भी हिमायत करता है। इसके मुताबिक यदि किरायेदार निर्धारित समय सीमा से अधिक वक्त तक रहता है तो उसे दो महीने तक दोगुना किराया और उसके बाद चार गुना किराया अदा करना होगा। किरायेदार द्वारा अग्रिम राशि के तौर पर मकान मालिक के पास जमा की जाने वाली राशि अधिकतम दो महीने का किराया होगी।

द मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2019 का मसौदा जारी

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने परामर्श के लिए "द मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2019" का मसौदा सार्वजनिक किया है। इसमें कहा गया है कि मकान मालिक और किरायेदार को किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) की एक प्रति जिला किराया प्राधिकरण को सौंपनी होगी, जिसके पास भूस्वामी या किरायेदार के अनुरोध पर किराये की समीक्षा करने या उसे तय करने की शक्तियां होंगी। इसमें कहा गया है कि भूमि के "राज्य सूची" का विषय होने के चलते इस कानून को स्वीकार करने के लिए राज्य स्वतंत्र होंगे। हालांकि, राज्यों को स्पेशल रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल गठित करने की जरूरत होगी।

मकान खाली कराने को नहीं काट सकेंगे बिजली पानी

अधिनियम के मसौदा में यह भी कहा गया है कि मकान मालिक या भूस्वामी किराये के परिसर में मरम्मत कार्य कराने या पुरानी चीजों को बदलने के लिए 24 घंटे के पूर्व नोटिस के बगैर प्रवेश नहीं कर सकेगा। प्रस्तावित कानून के मुताबिक किरायेदार से विवाद होने की स्थिति में मकान मालिक बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं काट सकता है।

मकान मालिक के अधिकार

- रेंट एग्रीमेंट खत्म होने पर भी किराएदार अगर घर खाली नहीं करता तो मकान मालिक चार गुना तक किराया वसूले सकेगा

- किराये से रह रहा शख्स उस मकान को किसी दूसरे व्यक्ति के हाथों में नहीं सौंप सकेगा।

- जिस घर में किरायेदार रह हा है उसकी अच्छे से देखभाल और सुरक्षा करने की जिम्मेदारी उसी की होगी

- किरायेदार मकान को नुकसान नहीं पहुंचा सकते, नुकसान होने पर मकान मालिक को बताना होगा

किरायेदार के अधिकार

- अगर मकान मालिक किराया बढ़ाना चाहता है तो इसके लिए उसे तीन महीने पहले नोटिस देना होगा

- रेंट एग्रीमेंट के बीच किराया नहीं बढ़ेगा

- किराए से मकान देते वक्त सुरक्षा राशि दो महीने के किराए से ज्यादा नहीं ले सकेंगा मकान मालिक

- विवाद होने पर मकान मालिक बिजली, पानी जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं रोक पाएंगे