नई दिल्ली। सरकार हर भारतीय तक इंटरनेट की पहुंच बनाना चाहती है और इसके लिए उसने प्रायोगिक तौर पर अगले तीन सालों में देश के 2500 शहरों और कस्बों में फ्री हाई-स्पीड वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराने का फैसला किया है। सरकार की इस योजना को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा लागू किया जाएगा। इस योजना के लिए बीएसएनएल 7 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेगी।

हालांकि मुफ्त इस्तेमाल का लाभ सीमित समय के लिए ही मिलेगा और इसके बाद यूजर्स को इंटरनेट इस्तेमाल करने पर चार्ज देना होगा। यह मॉडल उसी तरह होगा जैसा प्राइवेट ऑपरेटर्स द्वारा एयरपोर्ट और दूसरी जगहों पर दिया जाता है। बीएसएनएल और एमटीएनएल के यूजर्स के लिए फ्री यूज की सीमा खत्म होने के बाद वाई-फाई की सुविधा के लिए बहुत मामूली चार्ज देना होगा।

बीएसएनएल के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुपम श्रीवास्तव ने बताया, 'यह सेवाएं अगले वित्त वर्ष (2015-16) में शुरू होंगी और हमारी योजना इसे सभी मोबाइल ऑपरेटर्स के उपभोक्ताओं को ऑफर करने की है।'

माना जा रहा है कि यह योजना मोदी के महत्वाकंक्षी डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का हिस्सा है जिसका उद्देश्य देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बढ़ाना है। इसके साथ ही इस कदम से नुकसान में चल रही बीएसएनएल को मदद मिलने की भी संभावना है।

बीएसएनएल पिछले चार तिमाही से लगातार घाटे में चल रही है और 2013-14 में इसे करीब 7 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। बीएसएनएल और एमटीएनएल का पुनरुद्धार सूचना व प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद की प्राथमिकता सूची में टॉप पर है।