नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र के साथ ही निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए ग्रेज्युटी (Gratuity) एक महत्वपूर्ण निधि है जो भविष्य में काम आती है। सरकारी नियमों के मुताबिक किसी एक संस्था में लगातार 5 साल तक सेवाएं देने के बाद ही कोई भी कर्मचारी ग्रेज्युटी की पात्रता हासिल कर सकता है। किसी भी सूरत में अगर कर्मचारी पांच साल पूरे नहीं करता है तो उसे ग्रेज्युटी की लाभ नहीं मिल सकता है। केंद्र सरकार इस कड़े नियम से कुछ मामलों में राहत देने की कोशिश में है। यही वजह है कि मोदी सरकार ने लोकसभा में सोशल सिक्युरिटी कोड 2019 (Social Security Code 2019) को रखा है।

ग्रेज्युटी को लेकर यह संशोधन किए शामिल

मोदी सरकार ने लोकसभा में सोशल सिक्युरिटी कोड 2019 के तहत ग्रेज्युटी नियमों में संशोधन के लिए प्रस्ताव रखा। इसमें यह शामिल किया गया है कि 'वह कर्मचारी भी ग्रेज्युटी का हकदार होगा जिसने भले ही पांच साल की लगातार सेवाएं ना दी हों लेकिन नौकरी करने के दौरान ही उसकी मौत हो जाए या फिर वह किसी हादसे में विकलांग हो जाए अथवा उसका फिक्स टर्म एम्पलाइमेंट एक्सपायर हो जाए। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा नोटिफाई किए गए अन्य नियमों के अंतर्गत कर्मचारी आता हो।'

लोकसभा में पेश किए गए संशोधित बिल में यह भी कहा गया है कि किसी कर्मचारी की मौत होने के बाद ग्रेज्युटी की राशि नॉमिनी को दी जाएगी। अगर कर्मचारी ने नॉमिनी नहीं बनाया है तो कर्मचारी का कानूनी हकदार हो उसे ग्रेज्युटी प्रदान की जाए।

ऐसे होगी ग्रेज्युटी की गणना

केंद्र सरकार द्वारा तय किए नियमों के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी ग्रेज्युटी पाने का हकदार हो जाता है। तो उसेनिम्न फॉर्मूले के तहत ग्रेज्युटी मिलती है।

यह फॉर्मूला है: 15 दिनों का वेतन (15 days Wages) = पिछले माह का वेतन (Last Drawn Monthly Wages) / 26 x 15

20 लाख तक नहीं लगता है टैक्स

किसी कर्मचारी की ग्रेज्युटी अगर 20 लाख से कम होती है तो उसे इनकम टैक्स से छूट मिलती है। हालांकि अगर किसी मामले में कर्मचारी की ग्रेज्युटी 20 लाख से ज्यादा बनती है तो उसे आयकर चुकाना पड़ेगा।

Posted By: Neeraj Vyas

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