Gujarat: गुजरात राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बालासिनोर के केएमजी जनरल अस्पताल को एक मरीज के रिश्तेदारों को 11.23 लाख रुपए का हर्जाना देने का आदेश दिया है। दरअसल मरीज को किडनी में पथरी निकालने के लिए भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने उसकी किडनी निकाली ली। जिस कारण चार महीने बाद उसकी मौत हो गई। उपभोक्ता अदालत ने माना डॉक्टर के साथ अस्पताल भी लापरवाही के लिए जिम्मेदार है। हॉस्पिटल को 7.5 प्रतिशत ब्याज के साथ मुआवजे देने का आदेश दिया है।

क्या है मामला?

दरअसल खेड़ा जिले के वंघरोली गांव के देवेंद्रभाई रावल को कमर दर्द और यूरिन करने में परेशानी हो रही थी। ऐसे में उन्होंने केएमजी जनरल अस्पताल में डॉक्टर शिवुभाई पटेल को दिखाया। मई 2011 में पता चला कि उनके बाएं गुर्दे में 14 मिमी की पथरी है। रावल को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पताल में जाने की सलाह दी गई। लेकिन उन्होंने उसी अस्पताल में सर्जरी कराने का फैसला किया। 3 सितंबर 2011 को उनका ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बताया कि पथरी की जगह गुर्दे निकाले गए है। यह मरीज के हित में किया गया।

8 जनवरी 2021 को हुई मौत

इसके बाद देवेंद्रभाई रावल को पेशाब करने में ज्यादा दिक्कत होने लगी। तब उन्हें नडियाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उनकी हालत और बिगड़ी तो उन्हें अहमदाबाद के आईकेडीआरसी शिफ्ट किया गया। 8 जनवरी 2012 को उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी मीनाबेन ने उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से संपर्क किया। जिसने डॉक्टर, अस्पताल और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को 11.23 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया।

Posted By: Shailendra Kumar