नई दिल्ली। भाजपा आज जिस मुकाम पर है, उसके वहां तक पहुंचने में लाल कृष्ण आडवाणी की अहम भूमिका रही है। इसीलिए उन्हें भाजपा का पितृ पुरुष माना जाता है। वह बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल हैं। आज वह 92 साल के हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामना दी। उन्होंने ट्वीट में लिखा- विद्वान और सबसे सम्मानित नेताओं में से एक श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी को हमारे नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में दिए गए असाधारण योगदान भारत हमेशा याद रखेगा। उनके जन्मदिन पर मैं आडवाणी जी का सम्मान करते हुए उनके लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना करता हूं।

बताते चलें कि आडवाणी जी का जन्म अविभाजित भारत के सिंध प्रांत में 8 नवंबर 1927 को हुआ था, जो आज पाकिस्तान में है। वह 14 साल की उम्र से ही संघ से जुड़ गए थे। देश के विभाजन के समय उनका परिवार मुंबई आ गया, जहां उन्होंने कानून की पढ़ाई की। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के साथ मिलकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की नींव डाली। इसके चुनाव चिह्न के लिए आडवाणी ने कमल के फूल को चुना था, जो आज तक पार्टी का निशान बना हुआ है।

भारतीय जनता पार्टी को साल 1984 में महज दो सीटें मिली थीं। इसके बाद लाल कृष्ण आडवाणी, ने इस सफर को बढ़ाना शुरू किया। मजबूत नेता, मजबूत सरकार के नारे के साथ साल 2008 में बीजेपी ने लोकसभा का चुनाव आडवाणी के नेतृत्व में ही लड़ा था। इस चुनाव में आडवाणी पार्टी की तरफ से पीएम पद के उम्मीदवार घोषित किए गए थे। हालांकि, अयोध्या में राम मंदिर मामले के सूत्रधार रहे और हिंदूवाद का प्रखर नेतृत्व करने वाले आडवाणी यह चुनाव हार गए थे और इसी के साथ उनके पीएम बनने की मंशा अधूरी रह गई।

मगर, यह उनकी अथक मेहनत का ही नतीजा है कि भाजपा आज इस मुकाम तक पहुंची है कि देश की सबसे बड़ी और मजबूत पार्टी बनकर उभरी है। साल 2014 में भाजपा की सरकार बनी और साल 2019 में भाजपा 303 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली पार्टी बन चुकी है।

आडवाणी को साल 2015 देश के दूसरे सबसे बड़े सिविलयन अवॉर्ड पदम विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्होंने देश के सातवें उप-प्रधानमंत्री के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में अपना योगदान दिया। वह साल 1998 से लेकर 2004 तक सरकार में गृहमंत्री थे।

रथ यात्रा के बाद और बढ़ गया था कद

साल 1990 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली। हालांकि, उन्हें अयोध्या पहुंचने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। मगर, इसके साथ ही आडवाणी का राजनीतिक कद और बड़ा हो गया। वर्ष 1992 में ढांचा विध्वंस के बाद जिन लोगों को अभियुक्त बनाया गया है उनमें आडवाणी का नाम भी शामिल है।

बेहद लोकप्रिय नेता होने और संघ परिवार का पूरा आशीर्वाद होने के बावजूद आडवाणी ने साल 1995 में अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित कर दिया था। उनके इस फैसले से हर कोई हैरान था क्योंकि तब आडवाणी बड़ी आसानी से पीएम बन सकते थे। मगर, उन्होंने कहा कि भाजपा में वाजपेयी से बड़ा नेता कोई नहीं हैं। अपने पूरे राजनीतिक जीवन में वह अटल बिहारी वाजपेयी के साथ खड़े रहे और पार्टी में नंबर दो की स्थिति में बने रहे।

जिन्ना की तारीफ का उल्टा पड़ा था दांव

भारतीय राजनीति में सभी जगह अपनी स्वीकारिता बढ़ाने और पीएम पद के दावेदार होने के लिए उन्होंने पाकिस्तान जाकर मुहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की थी। शायद उन्हें लगा था कि इससे अल्पसंख्यकों का भी वह भरोसा जीत सकेंगे। मगर, यह दांव उलटा पड़ गया, जिसने उनके राजनीतिक जीवन को हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया। इसके बाद वह कई बार मामले की लीपा-पोती करते रहे, लेकिन पार्टी के अंदर और बाहर वह अपनी छवि को फिर से मजबूत नहीं कर सके।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai