प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट रामपुर के सांसद मो. आजम खां, उनकी पत्नी तंजीम फातिमा और बेटे मो. अब्दुल्ला आजम खां को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में अब्दुल्ला के खिलाफ रामपुर की अदालत में चल रहे मुकदमे व चार्जशीट को रद करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही जौहर यूनिवर्सिटी को मिली 1260 बीघा जमीन भी छिन सकती है।

एक राजनीतिक दल के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम खां को स्वार से विधायक बनवाने के लिए उनकी फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र बनवाया गया था। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपराध की प्राथमिकी दर्ज कराने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट से प्रथम दृष्टया आपराधिक मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार मौजूद हैं, लिहाजा मुकदमा खत्म करने का कोई औचित्य ही नहीं है।

इतना ही नहीं कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट को संज्ञान में लेते हुए एसीजेएम रामपुर ने आरोपियों को सम्मन जारी कर हाजिर होने का आदेश दिया है। मुकदमे की कार्रवाई व चार्जशीट रद करने की मांग में दाखिल याचिका कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले से आजम खां और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

बताते चलें कि अब्दुल्ला आजम खां ने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बीटेक व एमटेक की शिक्षा हासिल किया है। इनके शैक्षिक अंक व प्रमाण पत्रों में उनकी जन्म तारीख एक जनवरी 1993 दर्ज है। वहीं, अब्दुल्ला आजम खा को विधायक बनवाने के लिए 28 जून 2012 को रामपुर नगर पालिका परिषद से नया जन्म प्रमाणपत्र बनवाया गया, जिसमें उनकी जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 लिखी गई थी।

अग्रिम जमानत पर 17 फरवरी को सुनवाई

शत्रु संपत्ति कब्जाने के मामले में सांसद आजम खां और गलत तथ्यों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के मामले में विधायक अब्दुल्ला आजम की अग्रिम जमानत अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अब अदालत दोनों मामलों में 17 फरवरी को सुनवाई करेगी।

यूनिवर्सिटी की जमीन भी छिनने का खतरा

इसके अलावा आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी की 1260 बीघा जमीन छिनने का भी खतरा है। जौहर यूनिवर्सिटी की दो इमारतें पहले ही सीज की जा चुकी हैं। प्रशासन ने इसे लेकर केस दर्ज कर लिया है। यूनिवर्सिटी की जमीन को लेकर पहले से ही विवाद है। बताते चलें कि 26 किसानों ने जुलाई 2019 में आजम खां के खिलाफ जबरन जमीन पर कब्जा करने का केस किया था।

किसानों को वापस दिलवाई जमीनें

इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने आजम खां को भू-माफिया घोषित करते हुए किसानों को उनकी जमीनों पर कब्जा भी दिला दिया था। साथ ही चार एकड़ की भूमि पर भी कब्जा ले लिया। लेबर सेस के 1.37 करोड़ रुपए जमा न करने पर यूनिवर्सिटी की दो इमारतें कुर्क कर ली गई हैं, जिनकी नीलामी होगी। चकरोड की जमीन पर यूनिवर्सिटी की इमारत और चाहरदीवारी भी बनी है। प्रशासन ने इसे भी तोड़ने के लिए नोटिस दिया है, जिसका समय 16 फरवरी को पूरा हो रहा है।

नया मामला यूनिवर्सिटी की 1260 बीघा जमीन को लेकर है। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी कि सपा शासनकाल में कैबिनेट ने मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को जमीन खरीदने में स्टाम्प लगाने से छूट दी थी। बताया गया था कि ट्रस्ट चैरिटी का काम करती है, जिससे चलने वाली जौहर यूनिवर्सिटी में अल्पसंख्यकों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। हालांकि, ऐसा नहीं किया गया। इस शिकायत पर जांच पड़ताल भी हुई। अब प्रशासन ने केस दर्ज कर लिया है।

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