जालंधर। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी का शनिवार को निधन हो गया। वे 78 वर्ष के थे। परिजन के मुताबिक, ब्रिगेडियर चांदपुरी कैंसर से पीड़ित थे और मोहाली के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं। जानिए ब्रिगेडियर चांदपुरी के बारे में -

- 1971 के युद्ध पर बनी फिल्म बॉर्डर में सनी देओल ने मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी की भूमिका निभायी थी। फिल्म में देश के इस बेटे की वीरता को बखूबी दर्शाया गया था।

- लोंगेवाल की लड़ाई के दौरान मेजर रहे कुलदीप सिंह ने विषम परिस्थितियों में भी गजब का साहस दिखाया था। दुश्मन की टैंक रेजिमेंट के सामने वह न सिर्फ चंद सैनिकों के साथ टिके रहे, बल्कि दुश्मन को धूल भी चटा दी थी।

- 1971 के बाद जन्म लेने वाली जिस पीढ़ी ने कुलदीप सिंह का नाम नहीं सुना था, उसे भी इस फिल्म के जरिए ही इस वीर की वीरता के बारे में पता चला।

- सिर्फ 22 साल की उम्र में ही कुलदीप सिंह पंजाब रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में शामिल हो गए थे। ज्ञात हो कि यह भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सम्मानित यूनिट्स में से एक है।

- कुलदीप सिंह ने साल 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भी भाग लिया था। उन्होंने गाजा और मिश्र में संयुक्त राष्ट्र की आपातकालीन सेना में भी अपनी सेवाएं दी हैं।

- 4 दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान कुलदीप सिंह अपनी 120 सैनिकों की कंपनी के साथ लोंगेवाल में भारतीय सीमा की रक्षा कर रहे थे। इस दौरान पाकिस्तान की 51वीं इंफैंट्री ब्रिगेड के करीब 3000 सैनिकों ने उनकी पोस्ट पर हमला बोल दिया। यही नहीं पाकिस्तान को उसकी 22वीं आर्मर्ड रेजिमेंट भी मदद कर रही थी।

- फिल्म बॉर्डर में दिखाया गया है कि इस युद्ध में भारतीय सेना के कई जवान शहीद हो गए थे। लेकिन असल में कुलदीप सिंह को फिल्म में जितना बहादुर दिखाया गया है वह उससे भी कहीं ज्यादा थे। पाकिस्तानी सैनिक कुलदीप सिंह के सैनिकों को छू भी नहीं पाए और सिर्फ दो सैनिक घायल हुए थे।

- साल 1971 में उन्हें युद्ध के मैदान पर जबरदस्त साहस दिखाने के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। महावीर चक्र से सम्मानित किए जाने के दौरान उनके संबंध में कहा गया - "In this action, Major Kuldip Singh Chandpuri displayed conspicuous gallantry, inspiring leadership and exceptional devotion to duty in keeping with the highest traditions of the Indian Army."

- ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी में तमाम शोहरत पाने के बाद भी इंसानियत कूट-कूट कर भरी थी। वह हमेशा जरूरतमंदों की मदद करते थे। शनिवार सुबह चंडीगढ़ में ब्रिगेडियर चांदपुरी के निधन पर रिटायर्ड ले. कर्नल बलवीर सिंह ने उनके साथ बिताए पल साझा किए। बलवीर सिंह एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष हैं। वे सेना की 17 पैरा फील्ड रेजिमेंट से रिटायर हुए हैं।

उन्होंने ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। यादों के झरोखे में लौटते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल बलबीर सिंह ने बताया कि जब वह कसौली कैंटोनमेंट (हिमाचल प्रदेश) में पोस्टेड थे तो ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी से नियमित तौर पर मिलते थे। उनके व्यक्तित्व की खास बात यह थी कि वह सदा जमीन, इंसानियत और सेना से जुड़े रहें।

उनके जीवन से प्रेरणा लें लोग

ले. कर्नल ने कहा कि उस वक्त वह रिटायर हो चुके थे और मैं सर्विस में था। कई बार मैं उन से चंडीगढ़ में भी मिला। ब्रिगेडियर चांदपुरी कुछ समारोह में भाग लेने के लिए जालंधर भी आते रहते थे। तब भी उनसे मुलाकात होती रही। उनके निधन की सूचना बड़ी दुखदाई है। वह एक एग्जैंपलरी आर्मी ऑफिसर, एक उम्दा इंसान और सेना के इतिहास में अधिकारियों को प्रेरित करने वाले शख्स थे। हम सभी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश सेवा करनी चाहिए।

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