श्रीनगर। केंद्रीय गृहमंत्री बनाए जाने के बाद अमित शाह अपना पहला ही दौरा करने के लिए जम्मू कश्मीर के श्रीनगर पहुंच गए हैं। वे यहां दो दिन रहेंगे। हालांकि इस बात की उम्मीद कम ही है कि वे कोई बड़ा ऐलान करेंगे। उनकी इस यात्रा से कश्मीर मसला हल के लिए हुर्रियत और केंद्र के बीच बातचीत की प्रक्रिया बहाल होने की उम्मीद भी कम ही नजर आ रही है। शाह इतना जरूर कह सकते हैं कि देश की एकता, अखंडता और संविधान के दायरे में जो भी बातचीत के लिए आगे आना चाहता है, उसका सरकार स्वागत करेगी।

खुफिया अधिकारियों की मानें तो हुर्रिंयत नेताओं की कोई भी उम्मीद पूरी होने वाली नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि शाह ने अपने कश्मीर दौरे को अंतिम रूप देने से पहले जम्मू-कश्मीर के हालात पर फीडबैक लिया है। इस के आधार पर कहा जा सकता है कि शाह ऐसा कुछ करने वाले नहीं हैं, जिससे यह संकेत जाए कि केंद्र अलगाववादियों के आगे झुक गया है। यानी न किसी अलगाववादी नेता को रिहा करने का ऐलान होगा और ना ही संविधान के दायरे से बाहर जाकर बातचीत की पहल होगी।

यह है शाह का दो दिन का प्रोग्राम

  • शाह पहले दिन राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ अमरनाथ यात्रा के सुरक्षा प्रबंधों और राज्य के सुरक्षा हालात का जायजा लेंगे। वह पंच-सरपंचों, पहाड़ी, गुज्जर बक्करवाल समुदाय के प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे।
  • अगले दिन गुरुवार को शाह बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा के दर्शन करेंगे और बाद में श्रीनगर में प्रदेश भाजपा के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और 6 जुलाई को शुरू हो रहे राष्ट्रव्यापी सदस्यता अभियान पर चर्चा होगी।

इस बीच, हुर्रियत नेता हिलाल वार का कहना है कि हम हमेशा बातचीत के पक्ष में रहे हैं, क्योंकि जंग से कोई मसला हल नहीं होता। नई दिल्ली को बातचीत के लिए माहौल बनाना होगा। कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी के करीबी मोहम्मद अशरफ सहराई का मानना है कि हमें कश्मीर मुद्दे पर दिल्ली से बातचीत पर कोई ज्यादा उम्मीद नहीं है। अगर दिल्ली वाकई गंभीर है तो उसे यहां बातचीत लायक माहौल बनाने के लिए सुरक्षाबलों की कार्रवाई पर रोक लगानी चाहिए, जेलों मे बंद हुर्रियत पसंद नेताओं को रिहा करना चाहिए।

Posted By: Arvind Dubey