नई दिल्ली। यूं तो विवाह पश्चात स्त्री-पुरुष के बीच संबंध को पूरी तरह सही व शुभ माना जाता है, लेकिन ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार कुछ दिन ऐसे भी होते हैं जब पति-पत्नी को किसी भी रूप में संबंध स्थापित नहीं करने चाहिए।

आइए जानते हैं पति-पत्नी के मिलन के लिए ऐसे कौन से दिन निषेध माने गए हैं।

अमावस्या: शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन पति-पत्नी को एक-दूसरे से दूर रहना चाहिए यानि शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। इस दौरान संबंध बनाने से उनके विवाहित जीवन में नकारात्मकता आती है।

पूर्णिमा की रात: अमावस्या की तरह पूर्णिमा की रात भी विवाहित दंपत्ति के लिए संबंध बनाने को वर्जित माना जाता है। इस दौरान भी दंपति को एक-दूसरे से अलग ही रहना चाहिए।

संक्रांति: संक्रांति के दौरान भी पति-पत्नी को नजदीक नहीं आना चाहिए।

चतुर्थी-अष्टमी: चतुर्थी और अष्टमी तिथि पर भी विवाहित दंपत्ति को एक-दूसरे से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

रविवार: रविवार के दिन भी पुराणों के अनुसार पति-पत्नी को एक-दूसरे के निकट नहीं आना चाहिए।

श्राद्ध-पितृ पक्ष: श्राद्ध या पितृ पक्ष के दौरान पति-पत्नी को एक-दूसरे से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

व्रत: जिस दिन स्त्री या पुरुष का व्रत हो, उस दिन किसी प्रकार से साथी का संपर्क सही नहीं माना गया है।

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