नई दिल्ली। साल 1990 में हुई एयरफोर्स जवानों की हत्या के मामले में आखिरकार उनके परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद जागी है। जवानों की हत्या के मामले में जम्मू के TADA कोर्ट में 1 अक्टूबर से सुनवाई की जाएगी। इस मामले में 1990 से ही वह जमानत पर था। यासीन मलिक फिलहाल जेल में है। उसे NIA ने टेरर फंडिंग के मामले में हिरासत में लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यासीन मलिक को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिेए जज के सामने पेश किया जाएगा। बता दें कि 25 जनवरी 1990 को एयरफोर्स के जवानों की हत्या कर दी गई थी, इस मामले में अलगाववादी नेता यासीन मलिक का नाम सामने आया था।

इसके पूर्व 1989 में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी के अपहरण के मामले में भी यासीन की भूमिका सामने आई थी। इस मामले की सीबीआई द्वारा जांच की जा रही है। इन दोनों ही मामलों में सीबीआई द्वारा चालान पेश किया जा चुका है।

क्या है पूरा मामला

यासीन मलिक की लीडरशिप में जेकेएलएफ के आतंकियों ने 25 जनवरी 1990 को श्रीनगर के बाहरी इलाके में वायुसेना के जवानों पर हमला कर दिया था। जब जवान बस का इंतजार कर रहे थे उस दौरान आतंकियों ने उन पर गोलियां बरसा दीं थी। इस हमले में स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित एयरफोर्स के 4 जवान शहीद हो गए थे, वहीं कुछ लोग घायल हुए थे।

जम्मू की टाडा कोर्ट में 1990 में सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट में यासीन मलिक मुख्य आरोपी था। इस मामले को 1995 में जम्मू से अजमेर ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद इस मामले को 1998 में जम्मू की TADA कोर्ट में भेज दिया गया था।