नई दिल्ली। अब तक किराएदार और मकान मालिक के बीच अक्सर घर खाली करने और जबरन कब्जा करने के मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि, सरकार ने इसके लिए कानून बनाया है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा प्रावधान किया है जिसे जानने के बाद आप भी सतर्क हो जाएं तो बेहतर है।

कोर्ट के इस प्रावधान के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को 12 साल तक अपने कब्जे में रखने पर एक संपत्ति पर हक मिलता है तो वह इस संपत्ति को वास्तविक मालिक या अन्य किसी से अपने दावे के आधार पर ले सकता है।

सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को कहा कि अगर कोई व्यक्ति जो संपत्ति का असली मालिक नहीं है और उस संपत्ति को कम से कम 12 साल तक अपने कब्जे में रखता है और उस बीच असली मालिक उसे संपत्ति से बाहर करने का कोई मुकदमा नहीं करता तो वह संपत्ति उसी की मान ली जाएगी।

जस्टिस अरुण मिश्रा, एस.अब्दुल नजीर और एमआर शाह की खंडपीठ ने गुरुवार को कहा कि जो व्यक्ति जमीन का असली मालिक नहीं है, लेकिन उसे जमीन का कब्जा मिल जाता है। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ अगर जमीन का असली मालिक कम से कम 12 साल तक कोई मुकदमा नहीं करता है और उससे कब्जा छीन लिया जाता है तो वह कब्जा वापस पाने के लिए केस कर सकता है।

खंडपीठ ने कहा कि कानूनी तरीके के अलावा किसी भी व्यक्ति से उसकी संपत्ति का कब्जा नहीं छीना जा सकता है। अगर बारह साल बीत चुके हैं तो उस संपत्ति का असली मालिक भी उस पर अपना दावा करने का अधिकार खो देता है। इतने सालों से संपत्ति जिस व्यक्ति के कब्जे में थी, उसे ही आधिकारिक रूप से मिल जाएगी।