आम जनता के लिए यह काम की खबर है। जो लोग घरेलू गैस की कीमतों के कम होने का रास्‍ता देख रहे हैं, उन्‍हें यह जानकर झटका लग सकता है कि आने वाले समय में गैस के दाम बढ़ने की संभावना है। ताजा अनुमान बताता है कि LPG के साथ ही PNG, CNG भी महंगे हो सकते हैं। घरेलू गैस की कीमतों में वृद्धि लगभग तय है। इतना ही नहीं, यूरिया उद्योग की लागत में भी वृद्धि की आशंका है। आइये समझते हैं कि ऐसा क्‍यों है और इसकी वजह क्‍या है। असल में, सरकार को लगने लगा है कि अगर देश की इकोनॉमी में गैस की खपत की हिस्सेदारी मौजूदा सात से वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 15 प्रतिशत करनी है, तो घरेलू गैस की कीमत तय करने के मौजूदा तरीके को बदलना होगा। ऐसे में संभव है कि अगले कुछ दिनों में घरेलू क्षेत्रों से निकाली जाने वाली प्राकृतिक गैस की कीमत तय करने का फॉर्मूला इस तरह बदला जाए कि गैस उत्पादक कंपनियों को उनकी लागत मिल सके। ऐसे में सरकार भारतीय गैस क्षेत्रों से निकलने वाली गैस की कीमत जापान-कोरिया मार्केट प्राइस के आधार पर तय करने पर विचार कर रही है। यह फॉर्मूला देश में गैस की कीमत बढ़ाकर चार डॉलर प्रति एमएमबीटी (प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट- गैस मापने का मापक) पर ले जा सकता है। दूसरी तरफ घरेलू गैस का उत्पादन इस वर्ष अप्रैल-अगस्त के दौरान 13 प्रतिशत घटा है। सरकारी क्षेत्र की तेल व गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी का मुनाफा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून, 2020) में 92 प्रतिशत कम हुआ है और इसके लिए घरेलू गैस की कम कीमत बड़ी वजह साबित हुई है।

इसलिए जरूरी है मूल्य बढ़ोतरी

वर्ष 2014 से सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य के आधार पर हर छह महीने पर गैस की कीमत तय करती है, जो अभी 2.39 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू है। हाल के दिनों में गैस की कीमतों में और गिरावट को देखते हुए बहुत संभव है कि गुरुवार से ओएनजीसी, ओआइएल, आरआइएल व वेदांता जैसी घरेलू कंपनियों के लिए गैस की कीमत और घटाकर 1.90 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दी जाए। घरेलू गैस की कीमत में पिछले दो वर्षों से लगातार कमी हो रही है।

यह होगा इसका असर

इसका असर यूरिया व अन्य फर्टिंलाइजर की लागत पर दिखेगा। हालांकि इससे इससे घरेलू गैस सेक्टर में अधिक से अधिक निवेशकों को आकर्षिंत किया जा सकेगा। हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय के समक्ष एक प्रजेंटेशन में इन कंपनियों की तरफ से बताया गया है कि घरेलू फील्ड से गैस निकालने की लागत और कुछ मार्जिंन जोड़ने पर इसकी कीमत चार डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से कम नहीं होनी चाहिए। इनका कहना है कि मौजूदा कीमतों पर गैस उत्पादन बिल्कुल संभव नहीं होगा। सरकार भी मान रही है कि अगर भारत के गैस सेक्टर में देशी-विदेशी निवेशकों को बुलाना है तो उन्हें बेहतर मौका देना होगा।

50 प्रतिशत गैस आयात करता है भारत

भारत अपनी खपत का 50 प्रतिशत गैस आयात करता है। आयातित गैस पर निर्भरता तभी दूर होगी जब कंपनियों को गैस उत्पादन में फायदा हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार यह कह चुके हैं कि वर्ष 2030 तक देश में ऊर्जा खपत का 15 प्रतिशत गैस आधारित होना चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार ने बहुत ही तेजी से देशभर में पाइपलाइन गैस आधारित योजना शुरू की है साथ ही ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भी गैस की खपत बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

Posted By: Navodit Saktawat

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020