नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के भारत दौरे को लेकर तैयारियां जारी हैं। इस बीच खबर है कि ट्रंप के भारत दौरे पर दोनों देशों के बीच कुल 5 करार हो सकते हैं। हालांकि, हाल ही में ट्रंप ने वाशिंगटन में एक बयान में कहा था कि वो भारत के साथ एक बड़ी डील को अभी बचाकर रखने वाले हैं। दूसरी तरफ केंद्र की कैबिनेट ने अमेरिका के साथ MH-60 Romeo हेलीकॉप्टर सौदे को मंजूरी दे दी है। जहां तक ट्रंप के दौरे पर दोनों देशों के बीच होने वाले समझौतों की बात है तो इन पांच में से दो समझौते तो एक दूसरे के निवेश को बढ़ावा देने वाले और उन्हें सुरक्षा देने से संबंधित होंगे।

वहीं तीसरा समझौतादोनों देशों के गृह मंत्रालयों के बीच आंतरिक सुरक्षा को लेकर होगा। इसके अलावा एक बड़ा समझौता होगा MH-60 Romeo हेलीकॉप्टर डील से जुड़ा हुआ। इन सबके अलावा दोनों देशों की कंपनियों के सहयोग से परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने के संबंध में भी एक समझौता होने के आसार हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना है, "राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को एक निश्चित परिपक्वता देने की कोशिश होगी। दोनों नेताओं ने व्यक्तिगत तौर पर अपने रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश की है और अब इसे खास दिशा देने की कोशिश होगी।"

विदेश मंत्रालय के एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप की भारत यात्रा को सिर्फ बड़े समझौतों के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। जिस तरह से वर्ष 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की पहली यात्रा ने भारत-अमेरिका रिश्तों को बिल्कुल नया मोड़ दे दिया वैसा ही इस यात्रा के बाद होने की उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र, परमाणु ऊर्जा और कारोबारी क्षेत्र में मौजूदा कई गतिरोधों को आगे किस तरह से सुलझाया जाए, इसका एक खाका मिल जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, 25 फरवरी को मोदी और ट्रंप के सामने पांच समझौते करने की सहमति बन चुकी है और दो समझौतों पर बातचीत जारी है। लेकिन भारत-अमेरिका के भावी रिश्तों की असली झलक दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में दिखेगी। संयुक्त बयान रिश्तों की व्यापकता को समेटे हुए होगा।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन या बराक ओबामा भारत के अलावा पाकिस्तान भी गए थे, लेकिन इस बार राष्ट्रपति ट्रंप सिर्फ भारत की यात्रा पर आ रहे हैं।

मोदी और ट्रंप के बीच ऊर्जा सेक्टर को लेकर भी अहम बातचीत होनी है। पिछले दो वर्षों में अमेरिका भारत का एक बड़ा ऊर्जा साझीदार भी बनकर उभरा है। प्रवक्ता रवीश कुमार के मुताबिक भारत अभी अमेरिका से कच्चा तेल खरीदने वाला चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है। सितंबर, 2019 में जब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका गए थे तब भारतीय कंपनी पेट्रोनेट ने अमेरिकी एलएनजी कंपनी टेलुरिएन के साथ 2.5 अरब डॉलर का समझौता किया था। इस बार दोनों नेताओं के सामने यह प्रस्ताव रखा जाएगा कि किस तरह भारत-अमेरिका के बीच तरल प्राकृतिक गैस कारोबार को बढ़ाया जा सकता है।

अमेरिका ने भारत को कतर से भी कम दर पर एलएनजी देने का प्रस्ताव किया है।अमेरिका के सहयोग से भारत में लगाए जाने वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की भी समीक्षा की जाएगी। सनद रहे कि वर्ष 2008 के ऐतिहासिक परमाणु समझौते के मुताबिक अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस और भारतीय कंपनी एनपीसीआइ भारत में परमाणु संयंत्र लगाने वाले थे, लेकिन 12 वर्षों बाद अभी तक खास प्रगति नहीं हुई है। ट्रंप की यात्रा से ठीक पहले दोनों कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के बीच इस परियोजना को आगे बढ़ाने की बात हुई है। बहुत संभव है कि इस बारे में एक समझौता भी ट्रंप की यात्रा के दौरान हो।

Posted By: Ajay Barve