गलवन घाटी में भारत और चीन के बीच 15 जून को हुए खूनी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। भारत ने चीन के 59 ऐप्स पर बैन लगाकर चीन को कड़ा सबक सिखा दिया है। इस बीच कूटनीतिक स्तर पर भी चीन को घेरने के लिए भारत सरकार तैयारी कर रही है। हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए भारत ने चीन पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने कहा कि हॉन्ग कॉन्ग को स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन बनाना, चीन का घरेलू मामला है। मगर, भारत हाल की घटनाओं पर करीबी नजर रखे हैं।

बताते चलें कि यह पहली बार है जब हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर भारत ने चीन को घेर है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में 27 देशों ने चीन को घेरते हुए उससे हॉन्ग कॉन्ग में लागू किए गए नए कानून पर फिर से विचार करने को कहा है, जिसकी वजह से वहां के लोगों के मानवाधिकार का उल्लंघन होने की बात कही जा रही है।

अमेरिका ने दिया भारत का साथ

भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने भारत का पक्ष लेते हुए चीन पर निशाना साधा है। अमेरिका ने कहा है कि भारत के खिलाफ चीन लगातार आक्रामक बना हुआ है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव केली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हवाले से कहा- इलाके में भारत सहित दूसरे देशों के प्रति चीन का आक्रामक रवैया उसकी कम्युनिस्ट पार्टी वाली सत्ता का असली चेहरा दिखाता है। प्रेस सचिव ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद और तनाव के बीच अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है और चाहता है कि इसका कोई शांतिपूर्ण समाधान निकले।

चरणबद्ध सेनाएं हटाने को हुए तैयार

उधर, पूरी दुनिया की नजरें चीन और भारत के बीच बदल रहे घटनाक्रम पर लगी हैं। मंगलवार को चुशुल में दक्षिण शिनजियांग सैन्य डिस्ट्रिक्ट चीफ मेजर जनरल लियू लिन और 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरेंद्र सिंह के बीच 12 घंटों की मैराथन बैठक का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। मगर, बैठक के बाद दोनों पक्षों की इस बात पर सहमति बनी है कि जिन बातों पर सहमति बनी है, उन्हें जमीन पर उतारा गया है या नहीं, यह देखने के लिए दोनों पक्ष एक दूसरे पर 72 घंटों तक नजर रखेंगे। छह जून के बाद यह इस तरह की तीसरी बैठक थी।

दोनों देश चरणबद्ध तरीके से अपनी सेनाओं को वापस पीछे हटाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक चीन 22 जून की बैठक में भी चरणबद्ध तरीके से सरहद से हटने को तैयार हो गया था, लेकिन 8 दिन बाद भी हालात में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

भारत और चीन मोटे तौर पर पूर्वी लद्दाख की गलवन घाटी और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स में उन इलाकों से सैन्य टुकड़ियों को वापस हटाने पर सहमत हुए हैं, जिसकी वजह से 15 जून को चीनी सेना ने हमला कर खूनी संघर्ष को शुरू किया था। इस बीच मामले का जमीनी स्तर पर जायजा लेने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख मनोज नरवणे के शुक्रवार को लेह-लद्दाख जाने की खबर मिल रही है।

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Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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