नई दिल्ली। जिस राफेल विमान खरीदी को कांग्रेस ने लोकसभा और कईं विधानसभा चुनावों में मुद्दा बनाया वही राफेल विमान आखिरकार भारत आने को तैयार है। देश की सेना को इसका पहला राफेल विमान 20 सितंबर को मिल जाएगा। इस फायटर जेट को लेने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ स्वयं फ्रांस जाएंगे।

फ्रांस से मिलने वाले राफेल युद्धक विमानों के दो स्क्वाड्रन (प्रत्येक स्क्वाड्रन में करीब 16 से 18 विमान) हरियाणा के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर तैनात किए जाएंगे। इन 36 राफेल विमानों में से पहला विमान भारत को आगामी 20 सितंबर को मिलेगा।

रक्षा अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि हरियाणा स्थित अंबाला वायुसेना के हवाई अड्डे पर पहले से जागुआर युद्धक विमान तैनात हैं। आने वाले समय में यहां करीब 18 राफेल विमान भी तैनात किए जाएंगे। इसी तरह भूटान सीमा के नजदीक स्थित पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर इतने ही राफेल विमानों की तैनाती होगी।

अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार अत्याधुनिक राफेल विमान लाने के लिए रक्षा मंत्री के नेतृत्व में एक बड़ा दल सितंबर के तीसरे हफ्ते में फ्रांस भेज रही है। फ्रेंच कंपनी दासौ के बने राफेल विमान की निर्माण ईकाई बोर्डाक्स के करीब स्थित है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल को पहला राफेल विमान यहीं सौंपा जाएगा। शेष राफेल युद्धक विमान अगले साल मई में भारत आने शुरू हो जाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि भारत के विशेष रूप से बनाया गया राफेल विमान दरअसल फ्रांस की वायुसेना में इस्तेमाल हो रहे राफेल से कहीं बेहतर है। इसीलिए अगले साल मई के महीने तक इस राफेल विमान से भारतीय पायलटों को प्रशिक्षण देना जारी रखा जाएगा। भारतीय राफेल विमान में भारत की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसे कई विशेष शस्त्रों और उपकरणों से लैस किया गया है। इसलिए इस सौदे की लागत करीब एक अरब यूरो (79.38 अरब रुपये) है।

हालांकि भारतीय पायलटों की छोटी-छोटी टुकड़ियों को राफेल विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले साल मई में भारतीय वायुसेना 24 पायलटों को तीन अलग-अलग बैचों में प्रशिक्षित करेगी।