नई दिल्ली। 2024 तक देश का घरेलू रक्षा उद्योग निर्यात बढ़कर 35000 करोड़ रुपये का हो जाएगा। यह बात सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कही है। वर्तमान में देश सालाना 11,000 करोड़ रुपये की रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है। कांस्टीट्यूशन क्लब में विदेशी रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की बैठक को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि भारत स्वदेशी रक्षा उत्पादन नीति के तहत रक्षा सामग्री के उत्पादन के लिए प्रतिबद्ध है। इस अहम बैठक में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह भी मौजूद थे। सरकारी रक्षा उद्योगों के साथ कई निजी रक्षा फर्म भी इस बैठक में शिरकत कर रही हैं। करीब 22 निजी रक्षा फर्म इस बैठक के मौके पर स्वदेशी रक्षा उपकरण निर्यातक संघ (आइडीईईए) लांच करने के लिए सामने आए हैं।

जनरल रावत ने कहा, 'हम आपको आश्वस्त कर रहे हैं कि हम न केवल अपने रक्षा बलों को मजबूत करने के लिए हथियार और उपकरण बना रहे हैं, बल्कि अब हम प्रमुख निर्यातक के रूप में भी उभर रहे हैं। आज की हालत में हमारा रक्षा निर्यात सालाना 11,000 करोड़ रुपये पर है। 2024 तक इस आंकड़े को लगभग 35000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।' सेना प्रमुख ने कहा, 'आज की अनिश्चित और जटिलताओं से भरी दुनिया में हम अपने सुरक्षा मार्ग में पेश आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार हैं।

इन हालत में हम रक्षा उद्योगों से अपने रक्षा बलों की जरूरतों को पूरा करने वाले साधन मुहैया कराने की उम्मीद रखते हैं। कुछ सालों पहले सार्थक प्रयास किए गए और भारत में रक्षा क्षेत्र को ऊर्जा भरने के लिए कई योजनाएं लांच की गईं। और इसीलिए हम गंभीरता के साथ स्वदेशीकरण की नीति के लिए प्रतिबद्ध हैं।' केंद्र की मेक इन इंडिया इनिशिएटिव को परिभाषित करते हुए जनरल रावत ने कहा कि यह रक्षा कॉरिडोर के साथ और आगे बढ़ेगा। इस तरह के कॉरिडोर को भूमि अधिग्रहण को आसान बनाने, कर रियायत और अन्य मुद्दों के रूप में प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

Posted By: Yogendra Sharma