वैसे तो ट्रेनों में वेटिंग टिकट मिलना आम बात है और वो भी उन रूट्स पर जो कुछ ज्यादा ही व्यस्त माने जाते हैं। लेकिन आने वाले दिनों में शायद वेटिंग टिकट का झंझट ही खत्म हो जाए और यात्रियों को केवल कंफर्म टिकट ही मिलना शुरू हो जाएं। ऐसा इसलिए भी संभव है कि आने वाले दिनों में इन व्यस्ततम माने जाने वाले रेल रूट्स पर प्राइवेट ट्रेनें चलाए जाने की तैयारी की जा रही है। रेलवे ने प्राइवेट ट्रेनों को चलाने को लेकर उठे सवालों के बीच साफ किया है कि यह वर्तमान ट्रेनें नहीं होगी बल्कि अतिरिक्त होगी। इन ट्रेनों से इससे हर कोई लाभान्वित होगा। दरअसल, लगभग हर मुद्दे पर सरकार को घेर रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रेलवे में निजी रेल गाड़ी चलाने का विरोध करते हुए कहा था कि इससे गरीबों की जीवन रेखा छिन जाएगी।

उनके इस आरोप का जवाब देते हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने बताया कि हालांकि, इन ट्रेनों को शुरू होने में अभी तीन साल लगेंगे लेकिन यह उन लोगों को लिए तोहफा साबित होंगी जो वेटिंग लिस्ट की वजह से यात्रा में परेशानियों का सामना करते हैं। यादव के अनुसार, देश में पिछले साल में 840 करोड़ यात्रियों ने ट्रेनों से यात्रा की लेकिन इनमें से 5 करोड़ यात्रियों को रेलवे की लंबी प्रतीक्षा सूची के चलते यात्रा के लिए टिकट नहीं मिल पाया। नई ट्रेनों से वर्तामान ट्रेनों में ठूंसकर यात्रा करने वाले गरीबों को इससे राहत मिलेगी।

इन ट्रेनों का संचालन उन्हीं रूटों पर किया जा रहा है, जिन पर यात्रियों का बहुत बोझ है। यादव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि प्राइवेट ट्रेनों के संचालन से रोजगार बढ़ेगा। इन ट्रेनों के ड्राइवर, गार्ड और अन्य कर्मचारी रेलवे के ही होंगे, जिसके लिए प्राइवेट कंपनियों को भुगतान करना होगा।

इन क्लस्टर्स पर चलेगी ट्रेनें

प्राइवेट ट्रेनों के संचालन के लिए कुल 12 क्लस्टर का चयन किया गया है। इनमें बंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली और मुंबई के दो-दो क्लस्टर, हावड़ा, जयपुर, पटना, प्रयागराज व सिकंदराबाद प्रमुख हैं। इन 109 रूटों पर कुल 151 आधुनिक कोच से लैस ट्रेनें चलाई जाएंगी। इन ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा होगी। इसके लिए दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता के बीच फिलहाल 130 किमी प्रति घंटे वाले ट्रैक तैयार हैं। इन पटरियों को अगले दो सालों में 15 हजार करोड़ रुपए की लागत से 160 किमी की रफ्तार में तब्दील कर दिया जाएगा। यादव ने कहा कि प्राइवेट ट्रेन संचालन के क्षेत्र में ढेर सारी कंपनियां उत्सुकता दिखा रही हैं।

गति में सुधार की कवायद

रेलवे बोर्ड के सदस्य प्रदीप कुमार ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों से रेलवे द्वारा ट्रेनों की गति में सुधार के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, हम तकनीकी रूप से सभी ट्रैक, सिग्नल, कोच इत्यादि को अपग्रेड कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि ज्यादातर ट्रेनों के लिए नए लिंक-हॉफमैन-बुश (एलएचबी) कोच शुरू किए जाएं। इससे यात्रा ज्यादा आरामदायक होगी और ट्रेनों की रफ्तार 120-130 किमी प्रति घंटे तक बढ़ेगी, बशर्ते कि ट्रैक फिटनेस, सिग्नल और अन्य तकनीकी चीजें अनुकूल हों।

Posted By: Ajay Kumar Barve

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